मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए कंबाइन हार्वेस्टर पर टोल टैक्स खत्म करने का फैसला लिया है। अब फसल कटाई में इस्तेमाल होने वाले इन मशीनों को टोल प्लाजा पर शुल्क नहीं देना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हार्वेस्टर खेती का जरूरी उपकरण है और टोल माफी से किसानों का खर्च कम होगा। इससे फसल की लागत घटेगी और किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। यह फैसला मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम की बैठक में लिया गया। बैठक में कई सड़क परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई।

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इसके साथ ही पश्चिम भोपाल बायपास के नए एलाइनमेंट को भी मंजूरी मिल गई है, जिससे शहर में ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरकार का कहना है कि ये फैसले किसानों और आम जनता दोनों के लिए फायदेमंद साबित होंगे। भोपाल के वेस्टर्न बाईपास प्रोजेक्ट के नए एलाइनमेंट को मंजूरी दी गई।  मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कंपनी (MPRDC) ने 35.61 किलोमीटर लंबे नए मार्ग का एलाइनमेंट तैयार किया है, जिसमें वन क्षेत्र, वन्यजीव, रामसर साइट और समसगढ़ शिव मंदिर के संरक्षण का पूरा ध्यान रखा गया है। बैठक में इस एलाइनमेंट को स्वीकृति मिल गई। काम तेज करने के लिए भूमि अधिग्रहण शुरू हो गया है और फरवरी में धारा-11 की अधिसूचना जारी होने वाली है।

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वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए 5 किलोमीटर लंबा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर बनेगा। हाइवे के दोनों तरफ 12 फीट ऊंची जाली लगाई जाएगी और 610 मीटर लंबा वाइल्ड लाइफ अंडरपास भी तैयार किया जाएगा। रामसर साइट और नदियों के संरक्षण के लिए 20 से अधिक पुल-पुलियां बनेंगी। नए प्लान में बाईपास को रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर जोन से बाहर रखा गया है। पहले 6 किलोमीटर वन क्षेत्र प्रभावित होने वाला था, अब यह घटकर 5 किलोमीटर रह गया है। मंदिर को 100 मीटर दूर रखकर किसी नुकसान से बचाया गया है।

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यह बाईपास रतनपुर गांव से शुरू होकर फंदा के पास भोपाल-देवास रोड से जुड़ेगी। इसके बनने से इंदौर जाने वाले यात्रियों को 21 किलोमीटर दूरी बच जाएगी, शहर का ट्रैफिक जाम कम होगा और एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। भोपाल की करीब 40 प्रतिशत आबादी इसका फायदा उठाएगी। परियोजना की कुल लागत 3634.76 करोड़ रुपये है, जो पुराने अनुमान से 22 प्रतिशत ज्यादा है। राज्य बजट से 493.55 करोड़, शुरूआती भुगतान के लिए 723.34 करोड़ और 30 साल में रखरखाव के लिए 2313.98 करोड़ रुपये का प्रावधान है।



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