मध्यप्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहा तनाव उस वक्त सार्वजनिक हो गया, जब भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टरों के जरिए पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के समर्थकों ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता निधि चतुर्वेदी पर सीधा हमला बोला, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है। हालांकि बाद में पोस्टर हटा दिया गया।
दिग्विजय को सूरज और निधि को जुगनू बताया
पीसीसी कार्यालय के बाहर लगाए गए पोस्टरों में प्रतीकात्मक भाषा का इस्तेमाल करते हुए दिग्विजय सिंह को सूरज और निधि चतुर्वेदी को जुगनू बताया गया है। पोस्टर में लिखा गया कि कुछ ‘जुगनू’ सूरज के पीछे पड़ गए हैं, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि दिग्विजय सिंह का राजनीतिक कद बड़ा है और उनके आलोचक महत्वहीन हैं। इस पोस्टरबाजी को कांग्रेस की आंतरिक कलह का खुला प्रदर्शन माना जा रहा है।
यह है विवाद की जड़
दरअसल, यह पूरा विवाद उस वक्त शुरू हुआ था, जब कांग्रेस नेता निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह की एक सोशल मीडिया पोस्ट पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई थी। उन्होंने साफ कहा था कि कांग्रेस की विचारधारा आरएसएस से पूरी तरह अलग है और यदि पार्टी के वरिष्ठ नेता संघ की तारीफ करेंगे, तो इससे कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी अनुशासन सभी के लिए समान होना चाहिए, चाहे नेता कितना ही वरिष्ठ क्यों न हो।
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जयवर्धन सिंह की एंट्री
विवाद के बीच दिग्विजय सिंह के बेटे और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने भी एक वीडियो साझा कर अप्रत्यक्ष रूप से निधि चतुर्वेदी पर निशाना साधा। वीडियो में दिग्विजय सिंह को एक सभा के दौरान दिखाया गया है, जिसके बैकग्राउंड में फिल्मी डायलॉग चल रहा है। पोस्ट के साथ जयवर्धन सिंह ने व्यंग्यात्मक शेरो-शायरी भी लिखी, जिससे विवाद और गहरा गया।
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संगठन पर असर
कांग्रेस प्रदेश में संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन इस तरह की खुली गुटबाजी पार्टी की एकजुटता और रणनीति दोनों पर सवाल खड़े कर रही है। पीसीसी दफ्तर के बाहर पोस्टर लगना इस बात का संकेत है कि मतभेद अब अंदरखाने तक सीमित नहीं रहे। फिलहाल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सार्वजनिक तौर पर संयम बरतने की अपील कर रहे हैं, लेकिन इस पूरे मामले पर पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इतना जरूर है कि पोस्टर विवाद ने एमपी कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
