मध्यप्रदेश में कृषि व्यवस्था को लेकर सियासत तेज हो गई है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर प्रदेश के कृषि तंत्र की बदहाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ राज्य सरकार वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ बता रही है, वहीं दूसरी तरफ कृषि और उससे जुड़े विभागों में हजारों पद खाली पड़े हैं, जिससे किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। कांग्रेस कमेटी की ओर से भेजे गए पत्र में पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश को देश का कृषि प्रधान राज्य कहा जाता है, लेकिन आज कृषि व्यवस्था सरकारी उदासीनता के कारण कमजोर होती जा रही है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग में स्वीकृत 14,537 पदों में से 8,468 पद खाली हैं, यानी लगभग 60 प्रतिशत अमला ही मौजूद नहीं है।

दूसरे विभागों पद खाली

पटवारी के मुताबिक स्थिति सिर्फ कृषि विभाग तक सीमित नहीं है। मत्स्य पालन विभाग में 1,290 में से 722 पद, उद्यानिकी विभाग में 3,079 में से 1,459 पद और पशुपालन एवं डेयरी विभाग में 7,992 में से 1,797 पद खाली हैं। सहकारिता विभाग में भी करीब 35 प्रतिशत पद रिक्त बताए गए हैं।उन्होंने खाद्य तंत्र की स्थिति को भी चिंताजनक बताया। खाद्य संचालनालय में 109 पदों के मुकाबले केवल 48 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जबकि जिलों के कार्यालयों में 598 पदों के बदले 245 कर्मचारी ही तैनात हैं। खाद्य आयोग में भी 61 में से 48 पद खाली पड़े हैं।

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शीर्ष स्तर पर भी हालात अच्छे नहीं

पटवारी ने कहा कि कृषि प्रशासन के शीर्ष स्तर पर भी हालात अच्छे नहीं हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के 182 स्वीकृत पदों में से 113 पद खाली हैं। इनमें अपर संचालक, संयुक्त संचालक और उप संचालक जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। मैदानी स्तर पर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के करीब 60 प्रतिशत पद खाली हैं, जबकि यही अधिकारी किसानों तक योजनाएं और तकनीकी जानकारी पहुंचाने की अहम कड़ी माने जाते हैं।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश की कृषि संस्थाओं में भी यही स्थिति है। कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय में 1,065 में से 557 पद खाली हैं। बीज एवं फार्म विकास निगम, जैविक प्रमाणीकरण संस्था, कृषि विस्तार प्रशिक्षण संस्थान और मंडी बोर्ड में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं।

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प्रशासनिक ढांचा कमजोर

पटवारी ने कहा कि जब सरकारी तंत्र ही आधा खाली हो तो किसानों का कल्याण कैसे होगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसान पहले ही फसल नुकसान, बढ़ती लागत, बाजार की अनिश्चितता और मौसम की मार से जूझ रहे हैं, ऐसे में प्रशासनिक ढांचा कमजोर होने से उनकी समस्याएं और बढ़ रही हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि मध्यप्रदेश में कृषि और उससे जुड़े विभागों में रिक्त पदों की स्थिति की समीक्षा कराई जाए और जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू कराने के लिए राज्य सरकार को निर्देश दिए जाएं, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।



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