इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान वंदे मातरम को लेकर उठा विवाद पूरे सत्र पर हावी रहा। करीब साढ़े तीन घंटे तक चले सम्मेलन में शहर के विकास से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित चर्चा नहीं हो सकी और वंदे मातरम, गद्दार तथा भागीरथपुरा के मुद्दों पर ही बहस होती रही। अंततः शोर-शराबे और हंगामे के बीच बजट को बहुमत के आधार पर मंजूरी दे दी गई।

 

वंदे मातरम को लेकर सदन में शुरू हुआ विवाद

बजट चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्षद जब योजनाओं पर सवाल उठा रहे थे, तभी सदन में एक बार फिर हंगामा शुरू हो गया। इस दौरान भाजपा पार्षदों ने वंदे मातरम, जय श्री राम और “इस देश में रहना होगा तो वंदे मातरम कहना होगा” जैसे नारे लगाए। इसी क्रम में पार्षद फौजिया शेख अलीम पर आरोप लगाए गए और कांग्रेस पर देश की अस्मिता से समझौता करने के आरोप भी लगाए गए, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।

 

फौजिया शेख अलीम को सदन से बाहर जाने के निर्देश

सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले वंदे मातरम के दौरान फौजिया शेख अलीम की अनुपस्थिति को लेकर विवाद और गहरा गया। जब उन्होंने गंदे पानी से जुड़ा सवाल उठाने की कोशिश की, तो भाजपा पार्षदों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए सभापति की आसंदी तक पहुंचकर विरोध जताया। सभापति ने उन्हें सदन से बाहर जाने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए इनकार कर दिया। हालांकि कुछ समय बाद वे खुद सदन से बाहर चली गईं।

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फौजिया शेख ने दिया संविधान का हवाला

सदन से बाहर आने के बाद फौजिया शेख अलीम ने कहा कि जो कुछ सदन में हुआ, वह उचित नहीं था। उन्होंने कहा कि संविधान उन्हें इस प्रकार की छूट देता है। उनके अनुसार, इस्लाम में वे इस तरह से वंदे मातरम नहीं कह सकतीं और किसी को भी उन्हें जबरन गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रगीत के प्रति उनका सम्मान है, लेकिन इसे गाने के लिए मजबूरी नहीं होनी चाहिए।

 

कांग्रेस का रुख: राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत सर्वोच्च

वहीं, नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने इस पूरे मामले पर कांग्रेस का आधिकारिक पक्ष रखते हुए कहा कि पार्टी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के प्रति पूरी निष्ठा और ईमानदारी से प्रतिबद्ध है। उन्होंने इसे किसी सदस्य की व्यक्तिगत राय बताया और कहा कि कांग्रेस के लिए वंदे मातरम और जन गण मन सर्वोच्च हैं। इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष को जानकारी दे दी गई है और आगे का निर्णय पार्टी स्तर पर लिया जाएगा।

 

महापौर का बयान और कानूनी पहलुओं पर चर्चा

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी कुछ लोग गुलामी की मानसिकता के कारण इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फौजिया शेख अलीम वंदे मातरम गाने से बचने के लिए जानबूझकर देर से सदन में पहुंचीं। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले में पार्षदी से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

 

रूबिना खान के बयान से और बढ़ा विवाद

इसी बीच पार्षद रूबिना खान के बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि ‘अगर एक बाप की औलाद हो तो बुलवाकर दिखाओ’। साथ ही उन्होंने सभापति को ‘मुन्ना भैया’ कहकर संबोधित किया, जिस पर भाजपा पार्षदों ने कड़ी आपत्ति जताई और सदन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।

 



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