दिल्ली में हुई राष्ट्रीय स्तर की बैठक में मध्यप्रदेश की आशा-उषा महिला संगठन की प्रदेश अध्यक्ष नर्मदा ठाकरे को संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। सभी राज्यों की प्रतिनिधि आशा-उषा पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से उनके नाम पर मुहर लगाई। नर्मदा ठाकरे जिला पांढुरना (मध्यप्रदेश) से हैं और वह अब देशभर की करीब 10 लाख आशा-उषा सहयोगिनी बहनों का राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व करेंगी।
दिल्ली बैठक में हुआ निर्णय
देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित बैठक में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान सहित कई राज्यों की आशा-उषा संगठन की प्रदेश अध्यक्ष और पदाधिकारी मौजूद रहीं। बैठक के दौरान आशा-उषा कर्मियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई, जिसके बाद सर्वसम्मति से नर्मदा ठाकरे को राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।
16 दिसंबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि शीतकालीन संसद सत्र के दौरान आशा-उषा बहनों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर 16 दिसंबर 2025 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। मुख्य मांगों में सम्मानजनक मानदेय तय करना, नियमितीकरण और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। इस प्रदर्शन में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान समेत देश के कई राज्यों से बड़ी संख्या में आशा-उषा बहनों के शामिल होने की संभावना है।
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राष्ट्रीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने की कवायद
राष्ट्रीय बैठक में संगठन के अन्य राष्ट्रीय पदाधिकारियों की भी घोषणा की गई। पदाधिकारियों ने भरोसा जताया कि नर्मदा ठाकरे के नेतृत्व में आशा-उषा महिलाओं की आवाज और मजबूती से केंद्र सरकार तक पहुंचेगी।
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संघर्ष तेज करने का ऐलान
नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नर्मदा ठाकरे ने कहा कि आशा-उषा कार्यकर्ता स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन आज भी उन्हें सम्मानजनक मानदेय और सुरक्षित भविष्य नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि 16 दिसंबर का प्रदर्शन बहनों के अधिकारों की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा।
