मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम के तहत काम कर रहे हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को होली जैसे बड़े त्योहार पर भी वेतन नहीं मिल पाया। महीनों से भुगतान न होने के कारण कर्मचारियों के परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, जिससे इस बार कई घरों में होली का त्योहार फीका रह गया।मध्यप्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के अनुसार प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में करीब 30 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी विभिन्न इकाइयों में सेवाएं दे रहे हैं। इनमें करीब 70 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं, जो वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी निभा रही हैं। इसके बावजूद कई कर्मचारियों को 4 से 8 महीने तक वेतन नहीं मिला है।

निजी एजेंसियों और ठेकेदारों की मनमानी

संघ ने आरोप लगाया कि निजी एजेंसियों और ठेकेदारों की मनमानी के कारण कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। कई मामलों में कर्मचारियों को पूरा वेतन भी नहीं दिया जाता और कमीशनखोरी के चलते उनकी आय का बड़ा हिस्सा कट जाता है। संघ के मुताबिक कई जिलों में स्थिति बेहद गंभीर है।

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इन जिलों में नहीं मिली वेतन

उज्जैन में 8 महीने, बैतूल में 4 महीने, सागर में 5 महीने, जबलपुर और ग्वालियर में करीब 2 महीने से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। ऐसे में कई परिवार उधार लेकर घर चला रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि बच्चों की स्कूल फीस तक नहीं भर पा रहे, जिससे पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

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बड़े आंदोलन की चेतावनी दी

संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने कहा कि अस्पतालों में आउटसोर्स कर्मचारी रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रहे हैं और रोजाना 8 से 10 घंटे ड्यूटी दे रहे हैं। बावजूद इसके उनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच वेतन न मिलने से कर्मचारियों की हालत और खराब हो गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही वेतन भुगतान और शोषण की इस व्यवस्था पर सख्त कदम नहीं उठाए, तो प्रदेशभर के आउटसोर्स कर्मचारी राजधानी भोपाल में बड़ी संख्या में प्रदर्शन करेंगे और मजबूरी में सड़कों पर उतरने को बाध्य होंगे।

 



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