कलेक्टर और एसपी के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर कड़ी टिप्पणी की। सुशासन की समीक्षा के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार और पैसों के लेन-देन से जुड़ा एक मामला साझा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री तक यह बात पहुंचती है कि कई कलेक्टर बिना लेन-देन के काम नहीं करते। इस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कोई अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त है तो उसे हटा दीजिए। मुख्य सचिव की यह टिप्पणी सुनकर ऑनलाइन जुड़े कलेक्टर असहज नजर आए। लंबे समय से टल रही यह बैठक बुधवार को हुई, जिसमें यह भी सामने आया कि जनता की शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। शासन स्तर तक लाखों शिकायतें लंबित पाई गईं। बैठक के दौरान इंदौर से आई एक शिकायत में एफआईआर दर्ज न होने का मामला उठा। जब CS ने पुलिस कमिश्नर से जवाब मांगा तो वे वीडियो पर मौजूद नहीं थे और फोन भी बंद मिला। इस पर नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि आगे से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान एसपी की मौजूदगी अनिवार्य होगी, चाहे डीजीपी मौजूद हों या नहीं।

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अवैध गतिविधियों पर विशेष अभियान के निर्देश

मुख्य सचिव ने अवैध खनन और समाज विरोधी गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। भिंड, मुरैना, शहडोल, जबलपुर और नरसिंहपुर जैसे जिलों को विशेष निगरानी में रखते हुए अभियान चलाने को कहा गया। संकरी गलियों और संवेदनशील बस्तियों वाले 24 जिलों में जोनल प्लान तैयार किए जा चुके हैं, जबकि शेष जिलों को तीन माह में यह काम पूरा करने के निर्देश दिए गए।

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शिकायतों की अनदेखी उजागर

बैठक में यह भी सामने आया कि एससी-एसटी अत्याचार मामलों में पीड़ितों को समय पर राहत नहीं मिल रही है। कई जिलों में हिट एंड रन मामलों में अब तक मुआवजा नहीं बांटा गया। सीमांकन, नामांतरण और बंटवारे जैसे मामलों में कुछ जिले रेड जोन में हैं।

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ई-केवाईसी और सीएम हेल्पलाइन पर भी सवाल

समग्र आईडी की ई-केवाईसी में भोपाल और इंदौर जैसे बड़े जिले पीछे पाए गए। वहीं, सीएम हेल्पलाइन पर उच्च स्तर (एल-3 और एल-4) तक पहुंची शिकायतें भी बड़ी संख्या में लंबित हैं, जिनमें से कई की समयसीमा भी समाप्त हो चुकी है।

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