भोपाल की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी मीनाक्षी सिंह के जातिवाद को लेकर दिए गए एक बयान ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है। उनके इस बयान के बाद उनके पति और बहुजन नेता दामोदर यादव भी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

एक सम्मेलन में मीनाक्षी सिंह ने जातिवाद को “आज की जरूरत” बताते हुए कहा कि समाज में अपनी पहचान को लेकर सजग रहना जरूरी है और बच्चों को भी अपनी जाति के बारे में बताया जाना चाहिए। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं।

मीनाक्षी सिंह के पति दामोदर यादव पहले से ही अपने बयानों और आंदोलनों के कारण सुर्खियों में रहते हैं। हाल ही में उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा रोकने की बात कहकर विवाद खड़ा किया था। इस पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

दामोदर यादव मध्य प्रदेश के दतिया जिले के इंदरगढ़ के रहने वाले हैं। वे खुद को अंबेडकरवादी और बहुजन नेता बताते हैं। राजनीति में उनका सफर कांग्रेस से शुरू हुआ, बाद में वे आजाद समाज पार्टी में शामिल हुए। वर्ष 2023 में उन्होंने सेंवढ़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वे पेशे से किसान हैं और 12वीं तक शिक्षित हैं। वर्तमान में वे भीम आर्मी के एक प्रमुख चेहरे के तौर पर पहचाने जाते हैं और क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

दामोदर यादव अक्सर पंडित धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ मुखर रहते हैं। उनका आरोप है कि धीरेंद्र शास्त्री पाखंड फैलाते हैं, हालांकि वे यह भी कहते हैं कि उनका विरोध किसी जाति या धर्म से नहीं, बल्कि विचारधारा से है।

चुनावी हलफनामे के अनुसार, दामोदर यादव ने दो शादियां की हैं। उनकी पहली पत्नी इंदरगढ़ में रहती हैं, जबकि दूसरी पत्नी मीनाक्षी सिंह भोपाल में निवास करती हैं। मीनाक्षी सिंह से उन्हें एक बेटा और एक बेटी हैं।

एक ओर जहां दामोदर यादव अपने बयानों और आंदोलनों के जरिए सुर्खियों में रहते हैं, वहीं अब उनकी पत्नी मीनाक्षी सिंह का सार्वजनिक मंच से दिया गया बयान भी विवाद का कारण बन गया है। एक आईएएस अधिकारी होने के बावजूद उनके “जातिवाद जरूरी है” वाले बयान को लेकर प्रशासनिक मर्यादाओं और निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

इसके अलावा दामोदर यादव ने हाल में आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा पर हुई कार्रवाई का भी विरोध किया था। उन्होंने सरकार पर “मनुविधान लागू करने” का आरोप लगाते हुए इसके खिलाफ भोपाल में प्रदर्शन करने की चेतावनी दी थी।



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