प्रदेश की मोहन सरकार ने बजट में गरीब कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के लिए व्यापक प्रावधान किए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अल्प आय वर्ग और मुख्यधारा से पिछड़े समुदायों का उत्थान केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सेवा भावना के साथ किया जा रहा है।

जनजातीय और अनुसूचित वर्ग के लिए विशेष पहल

वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की कुल आबादी में लगभग 21 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति और 16 प्रतिशत अनुसूचित जाति वर्ग शामिल है। जनजातीय बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 267 विकासखंडों के 11 हजार 377 गांवों में कार्य किए जा रहे हैं, जिससे करीब 94 लाख लोग लाभान्वित होंगे। वर्ष 2026-27 के लिए इस अभियान हेतु 793 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण

सरकार ने पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के पारंपरिक व्यवसायों को प्रोत्साहित करने तथा बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की है। छात्रावासों को आदर्श छात्रावास के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के अंतर्गत 7 लाख 50 हजार विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया। सरदार पटेल कोचिंग योजना के तहत 4 हजार विद्यार्थियों को लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित है।

विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्ध-घुमक्कड़ समुदायों के लिए छात्रवृत्ति, शिक्षा प्रोत्साहन, बस्ती विकास और स्वरोजगार योजनाएं संचालित हैं। बजट में इन वर्गों के लिए 1 हजार 691 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

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वरिष्ठ नागरिक और सामाजिक सुरक्षा

प्रदेश में जीवन प्रत्याशा बढ़ने और वरिष्ठ नागरिकों की संख्या में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए भोपाल में सर्वसुविधायुक्त वृद्धाश्रम संध्या छाया प्रारंभ किया गया है। प्रदेश में चल रही विभिन्न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत वर्तमान में 54 लाख से अधिक नागरिकों को लाभ दिया जा रहा है।

राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना, दिव्यांग सहायता, मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना, माता-पिता भरण-पोषण योजना और अटल वयो-अभ्युदय योजना सहित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए 2 हजार 857 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।

खाद्यान्न और पोषण सुरक्षा

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत पिछले दो वर्षों में 5 करोड़ 25 लाख हितग्राहियों को 22 हजार 800 करोड़ रुपये मूल्य का 66 लाख 25 हजार मीट्रिक टन नि:शुल्क खाद्यान्न वितरित किया गया। सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लगभग 93 प्रतिशत हितग्राहियों का ई-केवाईसी पूरा किया जा चुका है और उचित मूल्य की दुकानों को जन पोषण केंद्र के रूप में उन्नत किया जा रहा है।

श्रमिक और महिला कल्याण

श्रमिकों के हित में केंद्र सरकार द्वारा पुराने 29 श्रम कानूनों के स्थान पर 4 नए श्रम संहिताएं अधिसूचित की गई हैं। प्रदेश सरकार ने फैक्ट्री अधिनियम, ठेका श्रम अधिनियम और औद्योगिक विवाद अधिनियम में संशोधन किए हैं।मुख्यमंत्री जन-कल्याण संबल योजना निरंतर संचालित है। कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के लिए 4 औद्योगिक क्षेत्रों के निकट 5 हजार 772 बेड क्षमता के हॉस्टल निर्माणाधीन हैं। श्रम विभाग के लिए 1 हजार 335 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 4 करोड़ 61 लाख खाते खोले जा चुके हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में 3 करोड़ 64 लाख, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में 1 करोड़ 54 लाख और अटल पेंशन योजना में 46 लाख पंजीयन दर्ज हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बजट को समावेशी विकास का दस्तावेज बताते हुए कहा कि गरीब, वंचित और श्रमिक वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत इस बजट में शिक्षा, पोषण, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और वित्तीय सशक्तिकरण के माध्यम से गरीब कल्याण को व्यापक आधार देने का प्रयास किया गया है।



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