विधानसभा में भागीरथपुरा पर आए स्थगन प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने नियमों का हवाला देते हुए खारिज कर दिया है। विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा की मांग पर व्यवस्था देते हुए कहा कि विधानसभा की नियमावली के नियम 55 के उपखंड 5 के अनुसार सत्र में लाए गए  स्थगन प्रस्ताव में  उस विषय की चर्चा नहीं हो सकती है जिस पर सदन के उसी सत्र में चर्चा हो चुकी है। उन्होंने व्यवस्था देते हुए कहा कि 19 फरवरी 2026 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का प्रश्न इसी विषय पर चर्चा में था जिस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं उत्तर दिया था। इसके अलावा अन्य सदस्य भी इस विषय पर प्रश्न कर चुके हैं। इन सभी के उत्तर सदन में पटल पर हैं। उन्होंने कहा कि उपखंड 7 के अनुसार सदन में उस विषय पर भी चर्चा नहीं हो सकती है जो किसी जांच आयोग के समक्ष है या न्यायालय में विचारधीन है। 

उन्होंने कहा कि इस घटना पर स्वयं न्यायालय ने संज्ञान लिया है। न्यायालय ने इस पर आयोग बनाया है। आयोग को सिविल कोर्ट के अधिकार दिए गए हैं। आयोग ने अपनी सुनवाई शुरू कर दी है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए भागीरथपुरा के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा नहीं हो सकती है।

बता देंं कि मध्यप्रदेश विधानसभा में इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल से हुई मौतों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार और अन्य सदस्यों ने इस मामले को लेकर स्थगन प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव को स्वीकार किया जाए या नहीं, इसी पर सदन में बहस शुरू हुई और माहौल गरमा गया था।

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मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बयान

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह घटना बेहद गंभीर और चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि नागरिकों ने पहले शिकायत की थी और पार्षद भी मौके पर पहुंचे थे। टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गई। मंत्री ने कहा कि यह घटना इंदौर के लिए कलंक है। कर्मचारियों और अधिकारियों ने मिलकर काम किया, लेकिन 22 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। उन्होंने कहा कि मृतकों की संख्या जांच का विषय है।  इस घटना का राजनीतिक इस्तेमाल किया गया। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की प्रतिक्रिया

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सत्ता पक्ष स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा से बचना चाहता है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके सवालों का जवाब सदन में दिया जाना चाहिए। यह केवल हादसा नहीं, बल्कि जनता के भरोसे की मौत है। उन्होंने कहा कि 10 साल की मन्नत के बाद जन्मी बच्ची की भी इस घटना में मौत हो गई।

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों को बचाया गया, जबकि दलित और आदिवासी अधिकारियों को हटाया गया। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री गलती स्वीकार कर रहे हैं तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार और लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि इंदौर में पानी की स्थिति बेहद खराब है। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद भी कड़ी कार्रवाई नहीं की गई।

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कांग्रेस विधायकों ने उठाए सवाल 

कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि इंदौर को आठ बार देश का सबसे स्वच्छ शहर चुना गया, जो गर्व की बात है, लेकिन भागीरथपुरा की घटना ने शहर का नाम खराब कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुरस्कार लेने मंत्री और महापौर आगे रहते हैं तो हादसे के बाद जिम्मेदारी क्यों नहीं लेते। उन्होंने यह भी कहा कि मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े दिए गए, जिससे भ्रम की स्थिति बनी।

कांग्रेस विधायक लखन गंगोरिया ने कहा कि यह केवल इंदौर का मामला नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का मुद्दा है। सचिन यादव ने कहा कि अक्सर छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े अधिकारियों को बचा लिया जाता है। उन्होंने महापौर के बयान पर भी सवाल उठाया और कहा कि यदि अधिकारी फोन नहीं उठाते तो यह गंभीर प्रशासनिक विफलता है। सचिन यादव स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा को जरूरी बताते रहे।

विपक्ष ने जारी रखा विरोध

अध्यक्ष ने कहा कि इस मामले में न्यायालय द्वारा आयोग गठित किया गया है और उसने काम शुरू कर दिया है। नियमों का हवाला देते हुए अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद विपक्ष ने विरोध जारी रखा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि क्या मध्यप्रदेश में स्वच्छ पानी, मृत्यु पर मुआवजा और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट पर चर्चा नहीं हो सकती। उन्होंने पूछा कि नगर प्रशासन मंत्री की जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की जा रही और क्या सरकार पूरे मध्यप्रदेश को भागीरथपुरा बनाना चाहती है। सदन में जोरदार हंगामा हुआ, जिसके चलते अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी नेता प्रतिपक्ष ने भागीरथपुरा पर चर्चा की मांग दोहराई। चर्चा की अनुमति न मिलने पर कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया था। 



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