लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी महज 40 दिन के भीतर दूसरी बार मंगलवार को मध्य प्रदेश पहुंच रहे हैं। इससे पहले वे 17 जनवरी को इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद पीड़ित परिवारों से मिलने आए थे। अब वे भोपाल में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में आयोजित किसान सभा को संबोधित करेंगे। पार्टी इसे राष्ट्रीय स्तर के अभियान की शुरुआत बता रही है।
भोपाल से राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत
24 फरवरी को भोपाल में प्रस्तावित कार्यक्रम में राहुल गांधी किसानों से संवाद करेंगे। कांग्रेस का आरोप है कि यह व्यापार समझौता किसानों और कृषि अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह है। पार्टी का दावा है कि प्रदेशभर से बड़ी संख्या में किसान कार्यक्रम में शामिल होंगे और सरकार की नीतियों पर खुली चर्चा होगी। नेताओं का कहना है कि इसमें भारी जनसमर्थन देखने को मिल सकता है।
2028 विधानसभा चुनाव पर नजर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का बार-बार मध्य प्रदेश आना 2028 के विधानसभा चुनाव की रणनीति से भी जुड़ा हो सकता है। कृषि प्रधान राज्य होने के कारण कांग्रेस यहां से किसान मुद्दों पर व्यापक संदेश देना चाहती है। इससे पहले भी राहुल गांधी ने संगठनात्मक अभियानों की शुरुआत मध्य प्रदेश से की थी।
सिंगरौली दौरे की अटकलें
हाल ही में सिंगरौली में वनों की कटाई और स्थानीय मुद्दों को लेकर किसानों ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने सिंगरौली आने का आश्वासन दिया है। अब यह देखना होगा कि वे वहां कब पहुंचते हैं और स्थानीय समस्याओं को किस तरह उठाते हैं।
गुटबाजी पर भी नजर
राहुल गांधी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान चर्चा में है। उप नेता प्रतिपक्ष पद से हेमंत कटते के इस्तीफे के बाद सियासी हलचल तेज हुई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कटारे के बीच मतभेदों की चर्चाएं भी सामने आई हैं। माना जा रहा है कि राहुल गांधी संगठनात्मक समन्वय और रणनीति पर भी नेताओं से बातचीत कर सकते हैं। कुल मिलाकर, राहुल गांधी का यह दौरा केवल एक सभा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे प्रदेश की सियासत और आने वाले चुनावी समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
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यह डील देश के किसानों के लिए गंभीर खतरा
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता देश के किसानों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। यदि सस्ता विदेशी सोयाबीन, मक्का और कपास भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर पहुंचता है, तो इसका सीधा असर प्रदेश के मेहनतकश किसानों, कृषि मंडियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना किसानों को विश्वास में लिए ऐसे समझौते कर रही है। सिंघार ने मांग की कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते से पहले किसानों के हितों की व्यापक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने वाले प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए।
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यह समझौता दबाव में किया गया
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि केंद्र की सरकार द्वारा अमेरिका के साथ किया गया व्यापार समझौता देश के किसानों के हितों के खिलाफ है। उनका आरोप है कि यह समझौता दबाव में किया गया और इससे किसानों की फसल, आय और भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सस्ता विदेशी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में आने से प्रदेश के किसान और कृषि मंडियां प्रभावित होंगी। पटवारी ने यह भी कहा कि कांग्रेस किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी और इस मुद्दे की सच्चाई गांव-गांव तक पहुंचाएगी।
