नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: नौनिहालों को कुपोषण और गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए प्रदेश में चलाए जा रहे दस्तक अभियान की रफ्तार बेहद धीमी नजर आ रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, विटामिन-ए अनुपूरण और एनीमिया फॉलोअप के मामले में प्रदेश के अधिकांश जिले लक्ष्य से काफी पीछे हैं। केवल चार जिलों को छोड़कर बाकी जिलों का प्रदर्शन कमजोर रहा है।
चिंताजनक बात यह है कि प्रदेश के प्रमुख महानगरों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहर भी इस अभियान में अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाए हैं। सामने आए आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और सुस्त गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्वालियर में लक्ष्य बड़ा, लेकिन उपलब्धि सीमित
ग्वालियर जिले में बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए लक्ष्य तो बड़ा तय किया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और पोर्टल पर डेटा एंट्री दोनों ही धीमी रफ्तार से हो रहे हैं।
विटामिन-ए अनुपूरण के तहत जिले में दो लाख 27 हजार 90 बच्चों को खुराक देने का लक्ष्य रखा गया था। इसके मुकाबले अब तक 76 हजार 710 बच्चों को ही विटामिन-ए की खुराक दी जा सकी है। यह कुल लक्ष्य का 33.78 प्रतिशत ही है।
इस आंकड़े से स्पष्ट है कि अभियान की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो सकी है।
एनीमिया फॉलोअप में सबसे खराब स्थिति
एनीमिया यानी खून की कमी से जूझ रहे बच्चों के फॉलोअप के मामले में स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक है।
जिले में 98 हजार 84 बच्चों के फॉलोअप का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन अब तक केवल 12 हजार 75 बच्चों का ही फॉलोअप किया जा सका है। यह कुल लक्ष्य का 12.31 प्रतिशत है, जो बेहद कम माना जा रहा है।
इस संबंध में डीपीएम विजय भार्गव का कहना है कि पोर्टल पर डेटा एंट्री को लेकर अब विशेष जोर दिया जा रहा है और छूटे हुए आंकड़ों को जल्द अपडेट कराया जाएगा।
प्रदेश में केवल चार जिले 60 प्रतिशत से ऊपर
प्रदेश के 51 जिलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो केवल चार जिले ही 60 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि हासिल कर पाए हैं।
- उमरिया – 86.44 प्रतिशत के साथ प्रदेश में पहला स्थान
- भिंड – 63.15 प्रतिशत
- रीवा – 63.01 प्रतिशत
- शहडोल – 62.83 प्रतिशत
इसके अलावा आगर मालवा (64.73 प्रतिशत), मंडला (63.76 प्रतिशत) और शाजापुर (62.26 प्रतिशत) का प्रदर्शन अपेक्षाकृत संतोषजनक माना जा रहा है।
कागजों पर काम, पोर्टल पर एंट्री नहीं
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस कमजोर प्रदर्शन पर कड़ी नाराजगी जताई है। विभाग का मानना है कि कई जगहों पर फील्ड में काम होने के बावजूद पोर्टल पर डेटा अपडेट नहीं किया जा रहा है, जो बड़ी लापरवाही है।
भोपाल स्तर से जिला प्रोग्राम मैनेजर (डीपीएम) और जिला टीकाकरण अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि छूटे हुए आंकड़ों की बैकलॉग एंट्री जल्द से जल्द पूरी की जाए।
अधिकारियों के मुताबिक, पोर्टल पर एंट्री न होने से न केवल जिलों की रैंकिंग प्रभावित हो रही है, बल्कि जरूरतमंद बच्चों की सही पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है।
इसलिए महत्वपूर्ण है यह अभियान
- विटामिन-ए अनुपूरण
- यह बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है और रतौंधी (अंधेपन) जैसी समस्या से बचाव करता है।
- एनीमिया फॉलोअप
- खून की कमी से पीड़ित बच्चों की नियमित निगरानी जरूरी है। यदि समय पर देखभाल न हो तो उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर स्थायी प्रभाव पड़ सकता है।
