मध्य प्रदेश में जून में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। दो सीटें भाजपा के डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन की हैं। वहीं, एक सीट कांग्रेस के पास है, जिस पर दिग्विजय सिंह सांसद हैं। मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट से तीन साल की सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई है। देर रात जारी आदेश में उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया। इस फैसले से कांग्रेस के संख्या बल पर सीधा असर पड़ा है और राज्यसभा चुनाव के पहले पार्टी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इससे पहले श्योपुर के विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को भी कोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट से उनकी सदस्यता शून्य होने के बाद सुप्रीम कोर्ट से राहत जरूर मिली है, लेकिन अदालत ने उन्हें विधानसभा सदस्य के रूप में किसी भी चुनाव में मतदान करने से रोक दिया है। इस निर्णय से राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति और कमजोर हो सकती है।
ये भी पढ़ें- MP Board Results: MP बोर्ड रिजल्ट की उलटी गिनती शुरू, 15 अप्रैल के पहले नतीजे संभव, 16 लाख छात्रों को इंतजार
कांग्रेस का संख्या बल घटा, बढ़ी चिंता
पहले विधानसभा में कांग्रेस के पास 66 विधायक थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 63 रह गई है। दरअसल बीना विधायक निर्मला सप्रे सीएम के साथ मंच साझा करने और भाजपा का पट्टा पहने के बाद दलबदल कानून का सामना कर रही हैं। हालांकि, उन्होंने कोर्ट में कहा कि वह अभी भी कांग्रेस में है। वहीं, कांग्रेस ही उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग कर रही है। इससे पहले छिंदवाड़ा के अमरवाड़ा से विधायक कमलेश शाह और विजयपुर से विधायक रामनिवास रावत इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे। इसमें भाजपा की सीट से कमलेश शाह तो चुनाव जीते, लेकिन रामनिवास रावत उपचुनाव मुकेश मल्होत्रा से हार गए थे। मल्होत्रा पर अदालत ने चुनाव में मतदान करने पर रोक लगाई है। ऐसे में राज्यसभा की सीट जीतने के लिए जरूरी आंकड़े को लेकर पार्टी की चिंता बढ़ गई है।
ये भी पढ़ें- भोपाल में चलती ट्रेन पकड़ना पड़ा भारी: 5 सेकंड में कई बार प्लेटफॉर्म के बीच घिसटा युवक, CCTV में कैद हुआ हादसा
एक राज्यसभा सीट के लिए चाहिए 58 वोट
मध्य प्रदेश में विधानसभा की 230 सीटें है। इसमें एक सीट जीतने के लिए जरूरी वोट 58 हैं। कांग्रेस के पास बहुमत से सिर्फ पांच वोट ज्यादा हैं, लेकिन कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का भी डर सता रहा है। वहीं, भाजपा की पास अभी 164 विधायक हैं। भाजपा के पास दो सीट के लिए जरूरी 116 वोट हैं, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसके पास 47 ही वोट हैं। यानी तीसरी सीट पर कड़ा मुकाबला संभव है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा तीसरी राज्यसभा सीट पर भी उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना सकती है। ऐसे में क्रॉस वोटिंग या अन्य समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है। यदि कांग्रेस में जरा भी टूट या असंतोष सामने आता है, तो तीसरी सीट पर पूरा समीकरण पलट सकता है।
