नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (एनईवाईयू) द्वारा मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की शिक्षा एवं भर्ती से जुड़ी समस्याओं को लेकर सोमवार को घंटाघर जबलपुर में भर्ती सत्याग्रह 2.0 के तहत प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के अभ्यर्थियों के अधिकारों को लेकर आयोजित किया गया।
एनईवाईयू के बैनर तले बड़ी संख्या में एमपीपीएससी अभ्यर्थी एकत्रित हुए और भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी, पदों की कमी, पारदर्शिता के अभाव और अनियमितताओं के खिलाफ शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के बाद अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों का ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा।
एनईवाईयू का कहना है कि एमपीपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षाओं में लगातार अनियमितताएँ सामने आ रही हैं। परीक्षाओं के परिणामों में अत्यधिक देरी, कम पदों का विज्ञापन और पारदर्शिता की कमी के कारण लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। संगठन ने प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं।
संगठन की मांग है कि मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा 2024 में कम से कम 700 पदों पर भर्ती की जाए। वहीं, राज्य वन सेवा परीक्षा 2026 में न्यूनतम 100 पद सुनिश्चित किए जाएँ और सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के रिक्त पदों की संख्या बढ़ाई जाए।
एनईवाईयू ने भर्ती प्रक्रियाओं में हो रहे घोटालों और प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए राज्य स्तर पर सख्त प्रश्नपत्र लीक कानून बनाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इस कानून के मसौदे में छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा, राज्य अभियांत्रिकी सेवा परीक्षा 2025 में कम से कम 400 पदों पर भर्ती, सहायक जिला अभियोजन अधिकारी भर्ती 2026 में न्यूनतम 300 पदों का विज्ञापन जारी करने तथा अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की गई है।
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सहायक प्राध्यापक भर्ती को लेकर भी संगठन ने मांग रखी कि राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा या राज्य पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के साथ-साथ अंतिम वर्ष के छात्रों को भी परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए, जैसा कि राजस्थान में पहले से लागू है। वन सेवा परीक्षा में उत्तर पुस्तिका दिखाने की व्यवस्था को लेकर एनईवाईयू ने कहा कि अभ्यर्थियों को कम से कम 87 प्रतिशत उत्तर-कुंजी देखने का अधिकार दिया जाए और पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
संगठन ने अतिथि और संविदा प्रथा को समाप्त करने की मांग करते हुए कहा कि सहायक प्राध्यापक भर्ती में अतिथि विद्वान आरक्षण व्यवस्था खत्म कर पूर्व की तरह 20 बोनस अंक की व्यवस्था फिर से लागू की जाए। साथ ही, राज्य सेवा परीक्षा में साक्षात्कार प्रणाली में सुधार करते हुए साक्षात्कार के अंक 100 तय किए जाएँ। सहायक संचालक उद्योग सहित सभी विभागों में नियुक्तियाँ राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त, पारदर्शी और योग्यता के आधार पर की जाएँ।
एनईवाईयू ने यह भी मांग की कि एमपीपीएससी की सभी परीक्षाएँ संघ लोक सेवा आयोग की तर्ज पर एक वर्ष की समय-सीमा में पूरी हों। परीक्षा प्रक्रिया घोषित होने के बाद उसमें कोई बदलाव न किया जाए और गलत प्रश्नों की संख्या एक या दो से अधिक न हो। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक है। जब तक अभ्यर्थियों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक छात्र आंदोलन जारी रहेगा।
