मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज उज्जैन जिले के महिदपुर तहसील स्थित डोंगला गांव पहुंचे, जहां तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” में उन्होंने सहभागिता की। इस दौरान कार्यक्रम के दूसरे दिन विद्यार्थियों के लिए आरसी प्लेन कार्यशाला के साथ ग्रहों और डीप स्काई ऑब्जर्वेशन किया गया।

वेधशाला में आयोजित “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” संगोष्ठी के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के अद्भुत समन्वय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उज्जैन प्राचीन काल से ही काल-गणना और भूगोल के अध्ययन का वैश्विक केंद्र रहा है और आज का आधुनिक विज्ञान भी हमारी प्राचीन पद्धति की वैज्ञानिकता को स्वीकार कर रहा है। संगोष्ठी में देशभर से जुटे खगोलविदों और वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि हमारी काल-गणना पद्धति इतनी सटीक है कि स्पेस टेक्नोलॉजी के इस युग में भी वैज्ञानिक आश्चर्यजनक रूप से उन्हीं निष्कर्षों के करीब पहुँच रहे हैं, जो हमारे ऋषियों ने सदियों पहले प्रतिपादित किए थे।

‘सरकार विज्ञान और अनुसंधान को निरंतर प्रोत्साहन दे रही’


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विज्ञान और अनुसंधान को निरंतर प्रोत्साहन दे रही है और यह संतोष का विषय है कि हमारी प्राचीन परंपराएं आधुनिक शोध के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। डोंगला की भौगोलिक स्थिति इसे खगोलीय अध्ययन के लिए विश्व का महत्वपूर्ण स्थान बनाती है। यहाँ से होने वाली गणनाएं सृष्टि के रहस्यों को समझने का आधार हैं।

‘प्राचीन भारतीय पद्धतियां आज भी पूरी तरह प्रासंगिक’


कार्यक्रम में विज्ञान, इतिहास और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञों ने इस बात पर मंथन किया कि कैसे प्राचीन भारतीय पद्धतियां आज के समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं। संगोष्ठी में विद्वानों ने काल के प्रभाव और ग्रहों की गति पर गहन चर्चा की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उज्जैन एक बार फिर दुनिया के “टाइम सेंटर” के रूप में अपनी पहचान सशक्त कर रहा है।

इसीलिए महत्वपूर्ण है डोंगला


कर्क रेखा पर स्थित डोंगला गांव खगोल विज्ञान और ज्योतिष के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी महत्व को देखते हुए वर्ष 2013 में मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा यहां आधुनिक वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला की स्थापना की गई थी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उज्जैन विज्ञान केंद्र का उद्घाटन किया, साथ ही यूएवी (ड्रोन), आरसी और सैटेलाइट निर्माण से जुड़ी कार्यशालाओं का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य युवाओं में विज्ञान और तकनीक के प्रति रुचि बढ़ाना है।

ये भी पढ़ें- Anuppur Building Collapse: लॉज की तीन मंजिला इमारत गिरी, एक की मौत; मलबे में 10 लोगों के फंसे होने की आशंका

कई प्रतिष्ठित संस्थानों ने लगाई प्रदर्शनी

यह सम्मेलन भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। साथ ही उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन (समय रेखा) के रूप में स्थापित करने की पहल भी मानी जा रही है। इस प्रदर्शनी में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ (शिक्षा मंत्रालय), सीएसआईआर, इसरो, टीआईएफआर, एमपीसीएसटी, आईआईटी इंदौर, डीआरडीओ और ब्रह्मोस एयरोस्पेस सहित कई प्रतिष्ठित संस्थान अपनी उपलब्धियां प्रदर्शित कर रहे हैं। इसके अलावा कालगणना और भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित पुस्तकों की अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *