इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैल रही जलजनित बीमारियों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। गंभीरता को देखते हुए कोलकाता, दिल्ली और भोपाल से विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की टीम मौके पर पहुंची और 30 से अधिक स्थानों से पानी के सैंपल लिए। अब इन सैंपलों की जांच की जाएगी।

कोलकाता स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैक्टीरियोलॉजी के वैज्ञानिक डॉ. प्रमित घोष और डॉ. गौतम चौधरी भागीरथपुरा के विभिन्न इलाकों से रैंडम तरीके से पानी के नमूने एकत्र कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पानी किन स्रोतों से दूषित हो रहा है।

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विशेषज्ञ टीम ने एमवाय अस्पताल और चाचा नेहरू अस्पताल जाकर मरीजों से सीधे बातचीत की। मरीजों में पाए गए उल्टी-दस्त जैसे लक्षण, इलाज और दवाइयों के असर की जानकारी जुटाई गई। इसके साथ ही स्टेट सर्विलांस टीम और विशेषज्ञ क्षेत्र में माइक्रो लेवल पर निगरानी कर रहे हैं ताकि बीमारी के फैलाव और जल स्रोतों के बीच संबंध का अध्ययन किया जा सके।

भागीरथपुरा को 30 से अधिक जोन में बांटने की कार्ययोजना


रविवार को कलेक्टर शिवम वर्मा ने बाहरी विशेषज्ञों के साथ बैठक कर भागीरथपुरा को 30 से अधिक जोन में बांटने की कार्ययोजना तैयार की। हर जोन में बोरिंग, पाइपलाइन और घरों के बेसमेंट में बने हौज की सफाई और क्लोरिनेशन कराया जा रहा है। प्रशासन ने साफ किया कि जांच और क्लोरिनेशन पूरी होने से पहले बोरिंग के पानी का उपयोग न किया जाए।

क्षेत्र में 17 स्वास्थ्य टीमें जुटीं


स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में घर-घर सर्वे और मरीजों के फॉलोअप की गति बढ़ा दी है। रविवार को 2354 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें 9416 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। इसके अलावा 429 पुराने मरीजों का फॉलोअप भी किया गया। क्षेत्र में 17 स्वास्थ्य टीमें, पांच एम्बुलेंस और डॉक्टरों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है।





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