मुरैना में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सिकरौदा नहर के पास 22 जनवरी को आलू व्यापारी से हुई लूट की वारदात को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र पाल सिंह डाबर ने पहले फर्जी बताते हुए फरियादी को ही आरोपी करार दे दिया था। हालांकि घटना के छह दिन बाद पुलिस अधीक्षक समीर सौरभ ने एसपी कार्यालय के प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल में उसी लूट का खुलासा कर दिया।

इस मामले में पुलिस ने गुना जिले के एक ट्रैवल एजेंसी संचालक, वाहन चालक सहित कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों के कब्जे से 18 लाख 50 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। वहीं अन्य फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने लूट को फर्जी बताया था, तो छह दिन बाद वही मामला सही कैसे निकला? क्या जल्दबाजी में व्यापारी को आरोपी बनाकर सच्चाई दबाने की कोशिश की गई?  

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जांच के दौरान पुलिस को फरियादी अमन और उसके दोस्त के पास से एक दर्जन एटीएम कार्ड और मोबाइल फोन मिले। जांच आगे बढ़ने पर सामने आया कि दोनों कथित आलू व्यापारी नहीं, बल्कि साइबर ठग हैं। दोनों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज हैं और वे जेल भी जा चुके हैं। एसपी समीर सौरभ ने बताया कि जांच में इनका किसी आलू व्यापारी या किसान से कोई लेन-देन सामने नहीं आया है। पुलिस को आशंका है कि लूटी गई रकम मनी लॉन्ड्रिंग या हवाला से जुड़ी हो सकती है। फिलहाल फरियादी के खिलाफ भी साइबर फ्रॉड के एंगल से जांच की जा रही है।

गिरफ्तार सात आरोपियों में एक आरोपी गौरव शर्मा, गुना के प्रसिद्ध प्राचीन हनुमान टेकरी मंदिर का पुजारी बताया जा रहा है। उसके पास से भी लूट की रकम बरामद हुई है। आरोपियों ने पहचान छिपाने और शक से बचने के लिए शिवपुरी के एक किराना स्टोर से मिर्च पाउडर के साथ धनिया पाउडर खरीदा था। पुलिस ने गुना से मुरैना तक 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर आरोपियों को चिन्हित कर राउंडअप किया।



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