चिमनगंज पुलिस ने साइबर फ्रॉड के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। यह गिरोह लोगों को झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और फिर उन्हीं खातों से अवैध ट्रांजैक्शन करता था। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में अंतरराज्यीय कनेक्शन सामने आने की आशंका है। मामला तब सामने आया जब मंगल नगर कॉलोनी निवासी विशाल चौहान ने शिकायत दर्ज कराई। विशाल ने बताया कि चंद्रावतीगंज (सांवेर) निवासी वाजिद ने उन्हें बैंक खाता खुलवाने का लालच दिया था। आरोपी ने आधार कार्ड, पैन कार्ड और 5 हजार रुपये लेकर खाता खुलवाने की बात कही। उसने यह भी कहा कि खाते में होने वाले हर ट्रांजैक्शन पर मोटा कमीशन मिलेगा। जब खाते में कोई राशि नहीं आई और पूरी प्रक्रिया संदिग्ध लगी, तो विशाल ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत केस दर्ज किया और उसे हिरासत में ले लिया।

‘म्यूल अकाउंट’ के जरिए रोजाना लाखों का लेनदेन

जांच में पता चला कि आरोपी दूसरे लोगों के नाम पर डमी खाते तैयार करता था। इन खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। इन खातों से प्रतिदिन करीब एक लाख रुपये तक का संदिग्ध लेनदेन हो रहा था। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन खातों का उपयोग साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन गेमिंग और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी अवैध रकम को खपाने के लिए किया जा रहा था।

 


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जामताड़ा कनेक्शन की भी जांच

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस रैकेट के तार जामताड़ा से जुड़े हैं, जिसे साइबर क्राइम का बड़ा केंद्र माना जाता है। अब तक तीन से ज्यादा संदिग्ध बैंक खातों की पहचान हो चुकी है। जांच में संकेत मिले हैं कि यह जाल केवल उज्जैन तक सीमित नहीं है, बल्कि इंदौर और प्रदेश के अन्य जिलों में भी फैला हुआ है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के सरगनाओं की तलाश कर रही है।

एडवाइजरी ट्रेडिंग के नाम पर बड़ा गोरखधंधा

उज्जैन, इंदौर और देवास में एडवाइजरी ट्रेडिंग के नाम पर लोगों से निवेश करवाकर धोखाधड़ी की जा रही है। तीनों जिलों में करीब 40 एजेंट काम कर रहे हैं। ये एजेंट गरीब लोगों से 5 से 10 हजार रुपये में बैंक खाते खरीदते हैं। फिर उन्हीं खातों से साइबर फ्रॉड का पैसा ट्रांसफर किया जाता है। रकम निकालकर रोजाना देवास के मुख्य सरगना तक पहुंचाई जाती है। एजेंटों को हर दिन 1000 से 1500 रुपये तक कमीशन मिलता है।

ऐसे पकड़ा गया आरोपी वाजिद

मंगलनगर निवासी 30 वर्षीय विशाल ने 17 फरवरी को पुलिस को सूचना दी। उन्होंने बताया कि 16 फरवरी को आगर रोड पर नगर निगम के सामने एक युवक मिला, जिसने अपना नाम वाजिद बताया। वाजिद ने कहा कि वह बैंक खाता खुलवाकर अच्छा पैसा दिला सकता है। उसने आधार, पैन कार्ड और पासपोर्ट साइज फोटो मांगे। उसने दो-तीन लोगों की चेकबुक, डायरी और एटीएम कार्ड भी दिखाए और दावा किया कि कई लोगों के खाते खुलवा चुका है। एक दिन बाद मिलने की बात कहकर वह चला गया। शिकायत मिलते ही पुलिस ने जाल बिछाया और वाजिद को पकड़ लिया।

भैरवगढ़ के मोबिन के नाम पर भी खाता

पुलिस जांच में पता चला कि वाजिद दो खातों को ऑपरेट कर रहा था। एक खाता भैरवगढ़ बृजपुरा निवासी मोबिन लियाकत के नाम पर मिला, जो मंदसौर क्षेत्र की एक निजी बैंक का है। दूसरे खाते का डेबिट कार्ड भी उसके पास था। पुलिस यह पता लगा रही है कि मोबिन ने खाता बेचा था या उसके साथ धोखा हुआ है।

एजेंट को मिला तीन दिन का रिमांड

पुलिस का कहना है कि कम पढ़े-लिखे और गरीब लोगों के बैंक खाते खरीदकर साइबर फ्रॉड और फर्जी ट्रेडिंग का पैसा जमा करने वाला यह बड़ा गिरोह हो सकता है। गिरोह का एजेंट पकड़ा गया है और उसे तीन दिन का पुलिस रिमांड मिला है। सरगना देवास या इंदौर का बताया जा रहा है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है।



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