इंदौर में अभी-भी रसोई गैस की किल्लत दूर नहीं हुई है। लोग खाली टंकियां लेकर इधर-उधर भटक रहे हैं। जिन घरों में रसोई गैस खत्म होने के कगार पर है, वे इसे किफायत से खर्च कर रहे हैं और कोयले, लकड़ी के विकल्प पर जा रहे हैं। इस कारण अब परिवार सिगड़ी भी खरीद रहे हैं।

अमेरिका और इस्राइल व ईरान के बीच जारी जंग का असर अब इंदौर में दिखने लगा है। इंदौर के डेढ़ हजार से ज्यादा रेस्त्रां बंद होने की स्थिति में हैं, जबकि कुछ रेस्त्रां संचालकों ने इंडक्शन खरीद लिए हैं। गैस कंपनियों में भी बुकिंग नहीं हो पा रही है और जो उपभोक्ता बुकिंग कर चुके हैं, उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। लोग अब एजेंसियों पर जाकर मैनुअल बुकिंग करा रहे हैं, क्योंकि सर्वर ठीक से काम नहीं होने के कारण टंकियों की डिलीवरी नहीं हो पा रही है?  इसका असर टिंबर मार्केट पर देखा जा रहा है। जलाऊ लकड़ियों की मांग बढ़ गई है। इंदौर में पहले दस से पंद्रह रुपये किलो में लकड़ी मिलती थी।

अब वह 20 से 25 रुपये किलो में मिल रही है। नलीदार कोयले की डिमांड भी बढ़ गई है। श्रमिक क्षेत्र में टाल संचालित करने वाले राजेश साहू बताते हैं कि पहले तीन बोरे कोयले की खपत एक दिन में होती थी, लेकिन अब पांच से छह बोरे बिक रहे हैं। आमतौर पर गर्मी के दिनों में सिगड़ी की डिमांड न के बराबर होती है, लेकिन गैस संकट के बाद हर दिन ग्राहक सिगड़ी खरीदने आ रहे हैं। रोज दस से ज्यादा सिगड़ी बिक रही है।



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