189 भवन स्वामियों पर संकट
इस परियोजना से कुल 189 भवन स्वामी सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश भवनों के 3 से 7 मीटर हिस्से को तोड़ने के लिए चिह्नित किया गया है। नगर निगम ने प्रभावितों को नोटिस जारी कर 7 दिन के भीतर स्वयं निर्माण हटाने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आर्थिक मुआवजे के बजाय भूमि विकास नियम-2012 के तहत अतिरिक्त एफएआर का लाभ दिया जाएगा।
24 नहीं, 15 मीटर पर सहमति की मांग
विरोध स्वरूप क्षेत्रवासियों ने अपने घरों और दुकानों पर काले फ्लैक्स लगाए हैं, जिन पर लिखा है कि “हम विकास के नहीं, विनाश के खिलाफ हैं। रहवासियों और व्यापारियों का कहना है कि वे 24 मीटर के बजाय 15 मीटर चौड़ी सड़क के पक्ष में हैं। उनका तर्क है कि 15 मीटर की चौड़ाई यातायात सुगमता के लिए पर्याप्त है, जबकि 24 मीटर किए जाने पर वर्षों की मेहनत से बने मकान और दुकानें मलबे में तब्दील हो जाएंगी।
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जानिए क्या है प्रस्तावित एमआर-4 मार्ग
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री द्वारा 26 नवंबर 2025 को इस परियोजना का भूमिपूजन किया गया था। प्रस्तावित एमआर-4 मार्ग की कुल चौड़ाई 45 मीटर निर्धारित है, लेकिन फिलहाल 24 मीटर पर कार्य शुरू किया जा रहा है। यह मार्ग रणकेश्वर महादेव के पास स्थित एमआर-5 फ्लायओवर से जुड़ते हुए शिप्रा नदी के छोटे पुल तक यातायात को सुगम बनाएगा।
यह भी जानिए
क्षेत्रवासियों का कहना है कि विकास के नाम पर घरों को पूरी तरह जमींदोज करना न्यायसंगत नहीं है। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने स्पष्ट किया कि वे 15 मीटर चौड़ीकरण के लिए सहर्ष तैयार हैं, जिससे सड़क भी बने और लोगों के आशियाने भी बच सकें। यदि 24 मीटर का पैमाना लागू किया गया, तो करीब 189 परिवार बेघर हो जाएंगे। वर्षों की मेहनत से घर बनाने वाले बुजुर्गों और महिलाओं की आंखों में आंसू हैं। एक स्थानीय महिला ने रोते हुए कहा कि हमने अपनी पूरी जमा-पूंजी इन मकानों में लगा दी। अगर ये टूटे, तो हम सड़क पर आ जाएंगे। हम विकास चाहते हैं, लेकिन अपनों की बर्बादी की कीमत पर नहीं।”
रहवासियों की उड़ी नींद
रणकेश्वर धाम से गाड़ी अड्डा और शिप्रा नदी के बड़े पुल तक प्रस्तावित निर्माण ने दारू गोदाम, अमर नगर और प्रीति नगर के रहवासियों की नींद उड़ा दी है। गलियों में अब सन्नाटे की जगह नारों और पोस्टरों की गूंज सुनाई दे रही है। घरों और दुकानों के बाहर लगे पोस्टर साफ संदेश दे रहे हैं कि “हम विकास के नहीं, विनाश के खिलाफ हैं।
