सनातन धर्म परंपरा में जैसे शक्ति उपासना के लिए देवी मंदिरों में नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, उसी तरह विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में शिव नवरात्रि विशेष श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में श्री महाकालेश्वर एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां शिव नवरात्रि का विधिवत आयोजन होता है।

श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि का शुभारंभ फाल्गुन कृष्ण पंचमी, 6 फरवरी से हो चुका है, जो महाशिवरात्रि महापर्व के अगले दिन तक चलेगा। इस अवधि में श्रद्धालुओं के लिए भगवान महाकालेश्वर के पट लगभग 44 घंटे तक दर्शनार्थ खुले रहेंगे।

महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा-अर्चना


महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान श्री महाकालेश्वर के मंगल पट भस्म आरती के लिए खोले जाएंगे। भस्म आरती के पश्चात प्रातः 7:30 से 8:15 बजे तक दध्योदक आरती, 10:30 से 11:15 बजे तक भोग आरती संपन्न होगी। इसके बाद दोपहर 12 बजे उज्जैन तहसील की ओर से पूजन-अभिषेक किया जाएगा।

सायं 4 बजे होल्कर एवं सिंधिया स्टेट की ओर से पूजन होगा। सायंकाल पंचामृत पूजन के उपरांत भगवान को नित्य संध्या आरती की तरह गर्म मीठे दूध का भोग अर्पित किया जाएगा।

महाशिवरात्रि की रात्रि में महाअभिषेक


15 फरवरी की रात्रि 11 बजे से संपूर्ण रात्रि और प्रातः 6 बजे तक भगवान श्री महाकालेश्वर का विशेष महाअभिषेक पूजन होगा। इस दौरान 11 ब्राह्मणों द्वारा एकादश रुद्रपाठ एवं विभिन्न वैदिक मंत्रों के साथ अभिषेक किया जाएगा।

अभिषेक में भस्म लेपन, पंच फलों के रस, पंचामृत (101 लीटर दूध, 31 किलो दही, 21 किलो खांडसारी, 21 किलो शहद, 15 किलो घी), गंगाजल, गुलाब जल, भांग तथा केसर मिश्रित दूध का प्रयोग किया जाएगा।



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सप्तधान्य मुखारविंद और दिन में भस्म आरती


फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी, 16 फरवरी 2026 सोमवार को अभिषेक के बाद भगवान श्री महाकालेश्वर को नवीन वस्त्र धारण कराए जाएंगे और सप्तधान्य का मुखारविंद सजाया जाएगा। सप्तधान्य में चावल, खड़ा मूंग, तिल, गेहूं, जौ, साल और खड़ा उड़द अर्पित किए जाएंगे।

इसके बाद भगवान का भव्य श्रृंगार कर पुष्प मुकुट (सेहरा), चंद्र मुकुट, छत्र, त्रिपुंड एवं अन्य आभूषण धारण कराए जाएंगे। सेहरा आरती के दौरान भगवान को चांदी का सिक्का, बिल्वपत्र तथा विविध मिष्ठान्न, फल और पंचमेवा का भोग अर्पित किया जाएगा।

वर्ष में एक बार दिन की भस्म आरती


16 फरवरी को प्रातः सेहरा दर्शन के पश्चात वर्ष में एक बार होने वाली विशेष भस्म आरती दोपहर 12 बजे संपन्न होगी। इसके बाद भोग आरती के साथ शिव नवरात्रि का पारणा किया जाएगा। सायंकाल पूजन, संध्या आरती और शयन आरती के पश्चात भगवान श्री महाकालेश्वर के पट मंगल होंगे। शिव नवरात्रि के इस दिव्य आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आस्था का माहौल बना हुआ है।



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