देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने शिरकत की। मंगलवार को आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने देवी अहिल्या बाई होल्कर के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि देवी अहिल्या ने 500 साल पहले महिला शिक्षा पर विशेष जोर दिया था। वर्तमान समय में चल रहे बेटी बचाओ अभियान और बेटियों की प्रगति को देखते हुए राज्यपाल ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से आज बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, उसे देखकर लगता है कि आने वाले समय में बेटा बचाओ अभियान के बारे में सोचना पड़ सकता है।

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सफलता के लिए नम्रता आवश्यक

राज्यपाल ने उपस्थित विद्यार्थियों को जीवन में सफलता के मंत्र दिए। उन्होंने छात्रों से कहा कि उन्हें हमेशा एक लक्ष्य निर्धारित करके आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जीवन के सफर में कठिनाइयां तो आती रहेंगी, लेकिन व्यक्ति अपनी नम्रता से ही महान बनता है। राज्यपाल के अनुसार, इंसान जितना अधिक नम्र रहेगा, वह उतना ही ऊंचा स्थान प्राप्त करेगा, जबकि अहंकार या अकड़ व्यक्ति को पीछे की ओर ले जाती है।

पुरस्कार और उपलब्धियों का विवरण

इस समारोह में कुल 221 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। पिछले दो वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित इस दीक्षांत समारोह में विभिन्न परीक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले करीब 150 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सांसद शंकर लालवानी और मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास भी मौजूद रहे। कुलपति प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि इस बार शैक्षणिक सत्र 2023-24 और 2024-25 का दीक्षांत एक साथ संपन्न हुआ है।

78 वर्ष की उम्र में स्वर्ण पदक

समारोह का एक मुख्य आकर्षण 78 वर्षीय सुषमा मोघे रहीं। केंद्रीय स्कूल से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने पढ़ाई के प्रति अपने जुनून को जीवित रखा और मराठी विषय में एमए करने पर गोल्ड मेडल प्राप्त किया। सुषमा मोघे ने बताया कि पढ़ाई के लिए उम्र की सीमा खत्म होने का उन्हें बहुत लाभ मिला। अब वे मराठी से हिंदी में अनुवाद का कार्य करना चाहती हैं। उन्होंने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि आज उन्हें जो सम्मान और तालियां मिलीं, उससे वे अत्यंत उत्साहित हैं।

छात्राओं का रहा दबदबा

दीक्षांत समारोह के आंकड़ों पर गौर करें तो इसमें छात्राओं का दबदबा स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। पीएचडी प्राप्त करने वालों में महिलाओं की संख्या अधिक रही। इसके साथ ही 121 मेडल प्राप्त करने वाले छात्रों में से 90 से अधिक छात्राएं थीं। सागर की छात्रा साक्षी जैन को सर्वाधिक 6 मेडल और झाबुआ की भव्या त्रिपाठी को 5 मेडल मिले। साथ ही 25 से अधिक ऐसे विद्यार्थी रहे जिन्हें 2 से 4 मेडल प्राप्त हुए। कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. अशोक सचदेवा और डॉ. मनीषा शर्मा पांडेय को डीलिट की उपाधि देने के साथ हुई। इस बार समारोह में अभिभावकों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।



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