अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अब मध्य प्रदेश, विशेषकर इंदौर और पीथमपुर के औद्योगिक क्षेत्रों पर दिखाई देने लगा है। युद्ध की स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतें आसमान छू रही हैं और लॉजिस्टिक खर्च में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसका परिणाम यह है कि उद्योगों में उत्पादन की लागत बढ़ गई है और कई फैक्ट्रियों में काम की शिफ्ट कम करनी पड़ी है। यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में उद्योगों में शटडाउन की स्थिति पैदा हो सकती है।
पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी ने बताया कि प्लास्टिक उद्योग सबसे अधिक प्रभावित है। कच्चे माल के दाम लगभग दो गुना हो गए हैं। पीवीसी, पाइप, बोतलें बनाने वाली कंपनियां बंद हो गई हैं। 100 से अधिक फैक्ट्रियां गैस से ही चलती हैं। इनमें 50 प्रतिशत गैस कम मिल रही है। दो से तीन शिफ्ट में काम करने वाली कंपनियों में एक ही शिफ्ट चल रही हैं। 20 हजार से अधिक लोगों का रोजगार सीधे खत्म हुआ है और अप्रत्यक्ष रूप से 10 हजार लोगों का काम खत्म हुआ है। वहीं 25 हजार कर्मचारियों की तनख्वाह आधी हो गई है। प्लास्टिक दाने की कीमत बढ़ने से कई यूनिट बंद होने की कगार पर हैं। इंदौर और आसपास के करीब 5000 से ज्यादा उद्योग अपनी कच्चे माल की जरूरत के लिए 60 फीसदी तक मिडिल ईस्ट के देशों पर निर्भर हैं। बहरीन, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों से आने वाले बल्क ड्रग और पेट्रोकेमिकल्स की आवक प्रभावित हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव की वजह से चीन और यूरोप से होने वाले आयात पर भी बुरा असर पड़ा है। इसके साथ ही समुद्री रास्तों में जोखिम बढ़ने से इंश्योरेंस मिलना भी कठिन हो गया है।
फार्मा सेक्टर में कच्चे माल की किल्लत, दवाओं के दाम पर पड़ेगा असर
आल इंडिया आर्गेनाइजेशन आफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (एआईओसीडी) के महासचिव राजीव सिंघल ने बताया कि मध्य प्रदेश के फार्मा उद्योग के लिए वर्तमान स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। बिजनेस गिर रहा है। एक माह जैसे तैसे स्थिति संभाल सकते हैं लेकिन उसके बाद चुनौती बढ़ जाएगी। गैस की कमी के कारण फार्मा कंपनियों में इंजेक्शन उत्पादन प्रभावित हो रहा है। दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पैरासिटामॉल पाउडर और अन्य रसायनों की कीमतों में रातों-रात 20 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया है। इसके अलावा पैकेजिंग सामग्री जैसे प्लास्टिक दाना और पीपी की दरें भी बढ़ गई हैं। स्थिति यह है कि अगले 10 से 12 दिनों के बाद दवाओं की सप्लाई और उत्पादन को लेकर बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है। हालांकि दवाओं की कीमत ग्राहकों के लिए बाजार में नहीं बढ़ाई जा रही है ताकि लोगों को परेशानी न हो। सरकार ने कुछ दवाओं पर 6.50 प्रतिशत दाम बढ़ाए हैं जो जल्द बढ़कर आएंगे। फार्मा में कच्चे माल का दाम 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिससे एक्सपोर्ट बंद हुआ है।
लॉजिस्टिक लागत में 5 गुना तक की वृद्धि
निर्यात के मोर्चे पर उद्योगपतियों को माल भेजने में भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। कंटेनर भाड़ा पहले की तुलना में 5 गुना तक बढ़ चुका है। मध्य प्रदेश से होने वाले कुल निर्यात में इंदौर की हिस्सेदारी लगभग 40 से 50 फीसदी है। हर महीने हजारों कंटेनर कांडला और जेएनपीटी बंदरगाहों पर भेजे जाते हैं, लेकिन फ्रेट चार्ज बढ़ने और शिपिंग में देरी के कारण विदेशी ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
ईंधन संकट और भुगतान की नई शर्तें
कच्चे माल के साथ-साथ ईंधन की उपलब्धता भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। एलपीजी की कमी के कारण कई उद्योगों को पीएनजी पर निर्भर होना पड़ रहा है। गैस कंपनियों ने अब उधार की सुविधा बंद कर दी है और नकद भुगतान की शर्त रख दी है। पहले जहां भुगतान के लिए एक से दो हफ्ते का समय मिलता था, वहीं अब तुरंत पैसे देने पड़ रहे हैं, जिससे उद्योगों की कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ गया है।
उद्योगों के हालात बयां करते आंकड़े…
* 20 से 30 फीसदी तक कच्चे माल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ गई हैं।
* 5 गुना तक लॉजिस्टिक और शिपिंग की लागत महंगी हो चुकी है।
* 10 से 15 फीसदी फैक्ट्रियों ने अब अपनी कार्यपालियों को दो शिफ्ट से घटाकर एक कर दिया है।
* 360 रुपए प्रति किलो तक पैरासिटामॉल पाउडर की कीमत पहुंच गई है जो पहले 290 रुपए थी।
* 5600 से ज्यादा उद्योग इंदौर के पीथमपुर, सांवेर रोड और पालदा क्षेत्र में संचालित हैं।
* 60 फीसदी तक कच्चे माल की आपूर्ति के लिए स्थानीय उद्योग मिडिल ईस्ट पर निर्भर हैं।
* 30 प्रतिशत तक प्लास्टिक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाला वर्जिन दाना महंगा हो गया है।
* 64 प्रतिशत की भारी वृद्धि ग्लिसरीन की कीमतों में दर्ज की गई है।
* 40 से 50 प्रतिशत तक प्रदेश का कुल एक्सपोर्ट अकेले इंदौर से किया जाता है।
* 80 हजार से अधिक कंटेनर हर महीने कांडला और जेएनपीटी बंदरगाहों के लिए भेजे जाते हैं।