झाबुआ और आलीराजपुर जिले में आदिवासी समुदाय का पारंपरिक उत्सव भगोरिया 24 फरवरी से शुरू होगा। पहले भगोरिया हाट का आयोजन मध्यप्रदेश और गुजरात की सीमा पर स्थित पिटोल में किया जाएगा। इसके साथ ही आसपास के कई गांवों में भी हाट बाजार सजेंगे।

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गांव लौटने लगे प्रवासी आदिवासी


भगोरिया को लेकर आदिवासी अंचलों में उत्साह का माहौल है। जो लोग काम-धंधे के सिलसिले में अपने गांवों से बाहर गए थे, वे भी अब वापस लौटने लगे हैं। बाजारों में रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा और सजावट की तैयारी दिखाई देने लगी है।

तारीखवार हाट का आयोजन


24 फरवरी को पिटोल के साथ खरडू बड़ी, थांदला, तारखेड़ी, बरबेट, बखतगढ़, आंबुआ और अंधारवाड़ में भगोरिया हाट लगेंगे।


25 फरवरी को उमरकोट, माछलिया, करवड़, कल्याणपुर, मदरानी, ढेकल, बरझर, खट्टाली, चांदपुर और बोरी में आयोजन होगा।


26 फरवरी को पारा, हरी नगर, सारंगी, समोई, फुलमाल, सोंडवा और जोबट में हाट भरेंगे।


27 फरवरी को बेकल्दा, मांडली, भगौर, वालपुर, कट्ठीवाड़ा और उदयगढ़ में आयोजन होगा।


28 फरवरी को राणापुर, मेघनगर, बामनिया, झकनावदा, बलेड़ी, नानपुर और उमराली में हाट लगेंगे।


1 मार्च को झाबुआ, धोलियावाड़, रायपुरिया, काकनवानी, कनवाड़ा, छकतला, कुलवट, सोरवा, आमखूंट और झीरन में आयोजन होगा।


2 मार्च को होलिका दहन के दिन आलीराजपुर, भाबरा, पेटलावद, बड़ागुड़ा, रंभापुर, मोहनकोट, कुंदनपुर और रजला में भगोरिया हाट सजेंगे।

आदिवासी संस्कृति की अनूठी पहचान


भगोरिया हाट साप्ताहिक बाजार की तरह आयोजित होते हैं, लेकिन इनमें आदिवासी संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन की विशेष झलक देखने को मिलती है। मध्यप्रदेश और गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ अंदरूनी आदिवासी गांवों में भी यह उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व आज भी आदिवासी समाज की पुरानी परंपराओं को जीवित रखे हुए है।



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