साल 2025 में इंदौर को कई बड़ी उपलब्धियां भी मिला। इनमें मेट्रो का कमर्शियल रन, आईटी पार्क 4, नए फ्लाय ओवर जलूद सोलर प्लांट आदि शामिल हैं। आइए जानते हैं कि इस साल इंदौर को क्या खास मिला और इससे इंदौर को कितना फायदा होने वाला है।
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इंदौर मेट्रो के कमर्शियल रन की शुरुआत
वर्ष 2025 इंदौर के यातायात इतिहास में ‘मेट्रो वर्ष’ के रूप में दर्ज हुआ है। 31 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंदौर मेट्रो के ‘सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर’ (गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर स्टेशन 3) का उद्घाटन किया। साल के अंत तक मेट्रो के अन्य हिस्सों पर काम तेज हुआ और खजराना से बड़ा गणपति तक के हिस्से को भूमिगत (Underground) बनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके लिए राज्य सरकार ने करीब ₹900 करोड़ का अतिरिक्त बजट आवंटित किया है।
20 हजार करोड़ का निवेश आया, आईटी पार्क 4 बना
इंदौर अब केवल व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि देश का नया आईटी हब बनकर उभरा है। अप्रैल 2025 में आयोजित ‘टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव’ में इंदौर को लगभग ₹20,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले, जिससे करीब 75,000 रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इंदौर के परदेशीपुरा में आईटी पार्क-4 और सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में नए आईटी पार्कों की आधारशिला रखी गई। सिंहासा आईटी पार्क में ‘भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड’ (BEL) के सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेंटर का भी विस्तार हुआ।
कई फ्लायओवर शुरू हुए
शहर को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे हुए। साल 2025 के दौरान शहर के प्रमुख चौराहों (जैसे भंवरकुआं और खजराना) पर फ्लायओवरों का काम अंतिम चरणों में पहुंचा। साथ ही, झलारिया और अर्जुन बरोदा क्षेत्र के फ्लायओवरों को नए साल (2026) की शुरुआत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया। बीआरटीएस (BRTS) कॉरिडोर पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया गया ताकि सार्वजनिक परिवहन और निजी वाहनों के बीच संतुलन बना रहे।
10 सांदीपनि स्कूल मिले
आईआईटी इंदौर ने ‘स्कूल ऑफ इनोवेशन’ के तहत नए शैक्षणिक प्रोग्राम (B.Des) की शुरुआत की घोषणा की, जो 2025 के शैक्षणिक सत्र से प्रभावी हुआ। IIM इंदौर में ‘CERE 2025’ जैसी अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसने इंदौर को ‘नॉलेज इकोनॉमी’ के वैश्विक मंच पर स्थापित किया। राज्य सरकार की योजना के तहत इंदौर के कई स्कूलों को ‘सीएम राइज’ स्कूलों के रूप में अपग्रेड किया गया, जहां स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक लैब की सुविधा दी गई है। बाद में इन्हें सांदीपनि स्कूलों में बदल दिया गया। इंदौर को 10 सांदीपनि स्कूल भी मिले। इनमें से 7 का काम पूरा हो चुका है।
सोलर सिटी बना शहर
इंदौर ने कचरा प्रबंधन के साथ-साथ अब सोलर सिटी और डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी शहरों में अपनी जगह बनाई है। इस क्षेत्र का विकास तेजी से हुआ है और यहां कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने कैंपस शुरू किए हैं। जलूद में 60 मेगावाट का सोलर प्लांट शुरू हुआ। इसे ग्रीन बॉन्ड के जरिए फंड किया गया है और जो शहर की बिजली जरूरतों को पूरा करेगा। नर्मदा के पानी को शहर तक लाने के लिए भी इस प्लांट की सोलर ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा।
