इंदौर में होली के पर्व को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। इस वर्ष शहरवासियों को केमिकल मुक्त रंगों का विकल्प देने के लिए वन विभाग और स्थानीय किसानों के माध्यम से हर्बल गुलाल उपलब्ध कराया जाएगा। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य उत्सव के दौरान स्वास्थ्य और प्रकृति दोनों की रक्षा करना है।

प्राकृतिक रंगों को मिलेगा बढ़ावा

वन विभाग द्वारा तैयार किए गए हर्बल रंगों और किसानों द्वारा टेसू के फूलों से बनाए गए प्राकृतिक रंगों की बिक्री के लिए शहर के प्रमुख स्थानों पर विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। शांति समिति की हालिया बैठक में यह सुझाव दिया गया था कि इन रंगों के काउंटर पहले ही स्थापित कर दिए जाएं ताकि नागरिकों को सुरक्षित विकल्पों की तलाश में भटकना न पड़े। ग्रामीण हाट बाजार को इन स्टॉलों के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना गया है।

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ग्रामीण हाट बाजार में विशेष स्टॉल

कलेक्ट्रेट की पहल पर संचालित ग्रामीण हाट बाजार में उन किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी जो हल्दी, चुकंदर और टेसू के फूलों जैसे प्राकृतिक स्रोतों से रंग तैयार करते हैं। इससे न केवल इंदौर के लोगों को त्वचा के लिए सुरक्षित रंग मिलेंगे, बल्कि जैविक खेती से जुड़े किसानों को अतिरिक्त आय का एक नया मंच भी प्राप्त होगा। शनिवार और रविवार को लगने वाले इस बाजार में अब हर्बल रंगों की महक बिखरेगी।

रासायनिक रंगों पर रहेगी सख्त निगरानी

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि त्योहार के दौरान बाजार में बिकने वाले रंगों की गुणवत्ता की सघन जांच की जाएगी। स्वास्थ्य के लिए हानिकारक और प्रतिबंधित रसायनों से बने रंगों की बिक्री रोकने के लिए विशेष जांच दल गठित किए गए हैं। मिलावटी रंगों के सैंपल लिए जाएंगे और नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

सुरक्षित रंगपंचमी की तैयारी

प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक प्रतिनिधियों के बीच हुई चर्चा में नकली रंगों की बिक्री पर कड़ी निगरानी रखने की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी। रंगपंचमी के दौरान निकलने वाली ऐतिहासिक गेर की सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ रंगों की शुद्धता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि समय रहते की गई यह पहल इंदौर को ‘हर्बल होली’ की दिशा में एक नई पहचान देगी।



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