आगामी सिंहस्थ महापर्व की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बनाई जा रही बड़वाह-महेश्वर-धामनोद फोरलेन सड़क परियोजना (SH-36) अब विवादों के घेरे में आ गई है। इस प्रस्तावित मार्ग के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण के विरोध में क्षेत्रीय किसानों ने लामबंद होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में 50 से अधिक गांवों के प्रभावित किसानों ने इस परियोजना के वर्तमान स्वरूप और मुआवजे की दरों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
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किसानों की महापंचायत में बनी आंदोलन की रणनीति
आंदोलन की रणनीति तैयार करने के लिए हाल ही में महेश्वर तहसील के ग्राम धरगांव में एक विशाल बैठक और सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में बड़ी संख्या में युवा किसानों के साथ-साथ इंदौर से आए राजस्व मामलों के जानकार, इंजीनियरिंग विशेषज्ञ और सामाजिक प्रभाव (SIA) के कानूनी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। भारतीय किसान संघ के संभागीय अध्यक्ष कृष्ण पाल सिंह राठौड़ ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि जब तक किसानों की जायज मांगें पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। बैठक में इंदौर के धर्मेंद्र चौधरी, उदयभान सिंह और कुलदीप सिंह जैसे अनुभवी किसान नेताओं ने भी अपनी बात रखी।
मुआवजे और कानून के उल्लंघन पर उठाए सवाल
किसानों का आरोप है कि वर्तमान में की जा रही भू-अर्जन की कार्यवाही 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून की मूल भावनाओं के विपरीत है। विशेषज्ञों ने बैठक में बताया कि अधिकारियों द्वारा कानून की अनदेखी कर मनमानी की जा रही है। किसानों की मुख्य मांग है कि उन्हें बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा दिया जाए और प्रस्तावित मार्ग की ऊंचाई धरातल के बराबर रखी जाए ताकि खेतों तक आवागमन बाधित न हो।
विशाल बाइक रैली निकालकर ज्ञापन देने पहुंचे किसान
अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से शासन तक पहुंचाने के लिए इसी सप्ताह धरगांव से मंडलेश्वर तक लगभग 10 किलोमीटर लंबी बाइक रैली निकाली गई। इस रैली में करीब 200 से अधिक किसान शामिल हुए, जो मंडलेश्वर के मुख्य मार्गों से होते हुए तहसील कार्यालय पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री और कलेक्टर के नाम एक विस्तृत ज्ञापन मंडलेश्वर एसडीएम को सौंपा गया। इस आंदोलन का नेतृत्व जिला अध्यक्ष अनिल व्यास, सदाशिव पाटीदार, जगदीश पाटीदार, डॉ. मोहित कुमार पाटीदार, संतोष टाटा और अन्य किसान प्रतिनिधियों ने किया।
बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में भारी अंतर
किसानों के विरोध का सबसे बड़ा कारण जमीन की सरकारी और वास्तविक दरों में जमीन-आसमान का अंतर है। ज्ञापन के अनुसार, लाडवी जैसे क्षेत्रों में जमीन का बाजार मूल्य 1 करोड़ रुपये प्रति बीघा से अधिक है, जबकि सरकारी गाइडलाइन में यह दर महज 5 से 10 लाख रुपये ही है। किसानों की मांग है कि वर्तमान गाइडलाइन दरों में तत्काल 300 प्रतिशत की वृद्धि की जाए। साथ ही, इंदौर की अन्य परियोजनाओं जैसे वेस्टर्न रिंग रोड और इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड रोड का उदाहरण देते हुए किसानों ने उसी तर्ज पर राहत राशि की मांग की है।
डायवर्सन पर रोक से भी भड़का गुस्सा
किसानों ने प्रशासन द्वारा भूमि उपयोग परिवर्तन (डायवर्सन) के आवेदनों पर लगाई गई रोक को असंवैधानिक बताया है। उनकी मांग है कि अंतिम अधिसूचना जारी होने तक सभी डायवर्सन आवेदनों को स्वीकार किया जाए और उसी आधार पर मुआवजा तय हो। इसके अलावा, बहुफसली उपजाऊ जमीन के बदले वैसी ही जमीन देने, पशुपालन और डेयरी पर पड़ने वाले सामाजिक प्रभाव का सटीक आकलन करने और बिना जनसुनवाई के प्रक्रिया आगे न बढ़ाने की शर्त भी रखी गई है।
किसानों से बातचीत जारी है, जल्द हल निकलेगा
तहसीलदार कैलाश कैलाश सत्या ने बताया कि बड़वाह से धामनोद तक बन रहे इस फोरलेन के संबंध में किसानों की कुछ मांगें हैं। इसी के चलते उन्होंने ज्ञापन दिया है। ज्ञापन को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा दिया है। किसानों से बातचीत जारी है, जल्द हल निकलेगा।
