मप्र में सिंहस्थ की तैयारियां जोरशोर से शुरू हो चुकी हैं लेकिन इंदौर में बनने वाले मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के सरकारी होटल को अभी भी हरी झंडी का इंतजार है। योजना को तैयार हुए एक दशक से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन सिंहस्थ के पहले भी यह धरातल पर नहीं उतर पाई है।

वर्तमान में इंदौर में मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम का अपना कोई होटल न होने के कारण पर्यटकों को निजी होटलों पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं विदेश पर्यटक निजी के बजाय सरकारी होटलों को प्राथमिकता देते हैं। इसमें मुख्य कारण सुरक्षा का रहता है। अब सिंहस्थ आने वाला है और उसमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक शामिल होंगे। इससे इस सरकारी होटल की प्रासंगिकता वर्तमान समय में और बढ़ गई है।

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2020 से कई बार हुए अधिकारियों के दौरे

प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए एग्रीकल्चर कॉलेज के समीप जमीन का आवंटन भी बहुत पहले कर दिया था। वर्ष 2020 के बाद से निगम के अधिकारियों ने कई बार स्थल का दौरा कर प्रोजेक्ट की रूपरेखा भी तैयार की, लेकिन वर्तमान में यह पूरा मामला निर्माण की पद्धति और बजट की ऊहापोह के बीच अटका हुआ है। शुरुआत में पर्यटन विकास निगम स्वयं इस होटल का निर्माण करना चाहता था, परंतु बाद में इसे पीपीपी मॉडल पर विकसित करने का निर्णय लिया गया, लेकिन वह भी अभी तक फलीभूत नहीं हो सका है।

जमीन पर अतिक्रमण बढ़ रहा, खटारा बसें खड़ी रहती हैं

जिस आवंटित जमीन पर आलीशान होटल का निर्माण होना है, वहां वर्तमान में एआईसीटीएसएल की खराब और पुरानी बसें खड़ी हुई हैं। इन बसों को वहां से हटाने का प्रयास पिछले तीन वर्षों से निरंतर किया जा रहा है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि इंदौर और इसके आसपास के क्षेत्रों जैसे उज्जैन के महाकाल लोक, ओंकारेश्वर के एकात्म धाम, मांडू की ऐतिहासिक विरासत और महेश्वर के नर्मदा तीर्थ में पर्यटकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। विदेशी पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए इंदौर में एक सर्वसुविधायुक्त सरकारी होटल की आवश्यकता महसूस की जा रही है, क्योंकि देश के अन्य राज्यों में पर्यटन निगमों ने अपने बेहतरीन होटल स्थापित किए हैं।

दस्तावेजों और पत्राचार में उलझा प्रोजेक्ट

रिकॉर्ड के अनुसार, पर्यटन विकास निगम ने 7 जून 2016 को कलेक्टोरेट कार्यालय में साढे सत्रह लाख रुपए जमा कर यह जमीन प्राप्त की थी। जमीन के एक हिस्से पर निगम का कार्यालय संचालित है, जबकि दूसरे बड़े हिस्से का उपयोग नगर निगम द्वारा डिपो के रूप में किया जा रहा है। जुलाई 2018 में नगर निगम ने बसें खड़ी करने के उद्देश्य से यह जमीन ली थी, लेकिन अब वहां फ्यूल स्टेशन भी शुरू कर दिया गया है। पर्यटन निगम ने 27 जुलाई 2019 और 4 अप्रैल 2022 को पत्र लिखकर जमीन वापस मांगी है, परंतु अभी तक नगर निगम की ओर से न तो कोई संतोषजनक जवाब मिला है और न ही जमीन खाली की गई है।

ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर आधारित होगा, बगीचा, स्विमिंग पूल और जिम भी होंगे

मध्य प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड के प्रबंध संचालक इलैयाराजा टी का कहना है कि यह प्रोजेक्ट जल्द ही धरातल पर उतरेगा और इसे पीपीपी मॉडल के माध्यम से मूर्त रूप दिया जाएगा। योजना के अनुसार, यहां 40 कमरों वाले एक लक्जरी इको होटल के निर्माण का प्रस्ताव है जो पूरी तरह से ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर आधारित होगा। इस तीन सितारा होटल में पर्यटकों के लिए बगीचा, स्विमिंग पूल, आधुनिक रेस्टोरेंट और जिम जैसी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। 



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