ऋतुराज वसंत पंचमी का पर्व आज शहर में श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ मनाया जाएगा। वसंत के आगमन के साथ ही शहर के बाग-बगीचों, खेत-खलिहानों और आसपास के क्षेत्रों में प्रकृति ने श्रृंगार कर लिया है।

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मंदिरों में पीले फूलों से होगा श्रृंगार

वसंत पंचमी के अवसर पर शहर के प्रमुख मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। तुलसी नगर स्थित मां सरस्वती धाम में महायज्ञ आयोजित होगा और मां सरस्वती को छप्पन भोग अर्पित किए जाएंगे। विद्याधाम आश्रम, गीताभवन, अन्नपूर्णा मंदिर, वैष्णोधाम मंदिर, खजराना गणेश मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पीले फूलों से प्रतिमाओं का श्रृंगार किया जाएगा।

स्कूलों में सरस्वती पूजन और विद्या आरंभ संस्का

शहर के स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती का पूजन किया जाएगा। कई समाजों में छोटे बच्चों का विद्या आरंभ संस्कार भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाएगा।

श्याम रथयात्रा और शोभायात्राएं

एबी रोड स्थित मालवीय नगर के खाटू श्याम मंदिर में 23वें वसंतोत्सव के तहत सुबह नौ बजे श्याम रथयात्रा निकाली जाएगी। इसके अलावा राधा-कृष्ण मंदिरों में भी शोभायात्राएं और विशेष आयोजन होंगे।

शुभ मुहूर्त में होंगे विवाह समारोह

हिंदू धर्मशास्त्रों में वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इसी कारण शहर और आसपास के क्षेत्रों में सैकड़ों विवाह समारोह आयोजित किए जाएंगे। लंबे समय से शुभ कार्यों पर लगे विराम के बाद वसंत पंचमी पर शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी।

सामूहिक विवाह सम्मेलन भी होंगे आयोजित

कोरी कोली समाज का निःशुल्क कन्या विवाह सम्मेलन नंदीग्राम परिसर में सुबह 11 बजे से आयोजित होगा। दोपहर एक बजे वर-वधू का चल समारोह निकलेगा। वहीं श्री कान्यकुब्ज विद्या प्रचारिणी सभा द्वारा आयोजित सर्व ब्राह्मण सामूहिक विवाह में 11 जोड़े परिणय सूत्र में बंधेंगे। नवदंपतियों को गृहस्थी का आवश्यक सामान भी प्रदान किया जाएगा।

मां सरस्वती के जन्म का पर्व, दान और पुण्य का विशेष महत्व

शास्त्रों के अनुसार वसंत पंचमी के दिन ही विद्या और संगीत की देवी मां सरस्वती का जन्म हुआ था। मां सरस्वती को विभिन्न नामों से पूजा जाता है और उनका वाहन हंस विवेक और शांति का प्रतीक माना जाता है। वसंत पंचमी पर बच्चों का अन्नप्राशन, पीले या सफेद वस्त्र धारण करना और पितृ तर्पण करना शुभ माना गया है। इस दिन किताबें, पेन, कॉपी जैसी शिक्षण सामग्री, पीले वस्त्र, भोजन, अनाज और गुड़ का दान विशेष पुण्यदायी माना जाता है। वसंत पंचमी को वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है। ठंड का प्रभाव धीरे-धीरे कम होगा और मौसम में गर्माहट बढ़ेगी। यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से लोगों को जोड़ने वाला माना जाता है।



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