इंदौर में मेट्रो का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। रीगल तिराहे पर और मल्हारगंज में मेट्रो स्टेशन का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। रीगल तिराहे पर रानी सराय पर पिछले 10 दिन से लोग धरने पर बैठे हुए हैं वहीं अब मल्हारगंज में धरना प्रदर्शन शुरू हो गया है। रीगल पर जनहित पार्टी और पर्यावरणप्रेमी मंच के द्वारा धरना दिया जा रहा है और मल्हारगंज में रहवासी संघ मेट्रो स्टेशन का विरोध कर रहा है। अभी यहां प्रतीकात्मक रूप से एक से दो घंटे का धरना दिया जा रहा है। पिछले दिनों भी यहां पर दो बार बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं। रहवासी मेट्रो के अधिकारियों का पुतला भी जला चुके हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि यहां पर घरों में बिना तोड़फोड़ के स्टेशन का काम होगा लेकिन रहवासी अब खुलकर मेट्रो स्टेशन के विरोध में आ गए हैं। 

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शहर को बर्बाद नहीं होने देंगे

यहां के व्यापारी शेखर गिरी ने कहा कि इंदौर में प्राचीन विरासत और संस्कृति वाला शहर है। राजबाड़ा से लेकर बड़ा गणपति तक हमारी कई धरोहरें मौजूद हैं। इस पूरे क्षेत्र में मेट्रो की वजह से हो रही उथल पुथल विनाश ले आएगी। हमारा स्पष्ट मानना है कि मेट्रो को शहर के बाहरी हिस्से में चलाना चाहिए। यदि मेट्रो मध्य इंदौर में से निकलेगी तो बहुत तोड़फोड़ होगी और कई लोगों को नुकसान होगा। शेखर गिरी ने कहा कि यहां पर रहवासियों ने कई बगीचे तैयार किए हैं, कई साल की मेहनत से पौधों को बड़ा करके पेड़ बनाया है। यह सब उजड़ जाएगा। लोगों के घर, दुकानें टूटेंगे और भविष्य में इन सब चीजों का क्या नुकसान होगा यह अभी से आंकलन करना भी मुश्किल है। 

गौरतलब है कि इंदौर में मेट्रो के अंडरग्राउंड हिस्से का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है और दो जगह उसके स्टेशनों का विरोध शुरू हो गया है। मेट्रो ट्रेन के लिए एक स्टेशन मल्हारगंज में बनना है। इसके लिए 12 से ज्यादा मकान बाधक बने हुए हैं। 

दुकानें बंद, घर घर लगे बैनर

यहां पर रहवासियों ने आज दुकानें बंद रखी और घर घर में बैनर पोस्टर लगाए। इन पर लिखा है कि रहवासी संघ मेट्रो स्टेशन का विरोध करता है। इससे पहले हुए विरोध प्रदर्शन में भाजपा नेता सत्यनारायण सत्तन और कांग्रेस नेता कृपाशंकर शुक्ला भी मौजूद रहे थे। 

जरूरी आंकड़े…

10 दिनों से रीगल तिराहे स्थित रानी सराय पर लोग धरने पर बैठे हुए हैं।

200 से अधिक पेड़ कटेंगे यहां पर मेट्रो स्टेशन के लिए।

12 से ज्यादा मकान मल्हारगंज में मेट्रो स्टेशन निर्माण की राह में बाधक बने हुए हैं।

2 बार पहले भी इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन किया जा चुका है।



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