इंदौर के डेली कालेज में गर्भ संस्कार पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि पीढ़ी की अमरता की निशानी संतान है। इससे संस्कार की धारा भी आगे बहती रहती है।गर्भ संस्कार के महत्व के हमारे अतीत में कई उदाहरण है। किस तरह अभिमन्यु ने गर्भ में रहकर चक्रव्यूह तोड़ने की बात सुनी थी।ये सभी को पता है। अब विज्ञान ने भी साबित कर दिया है कि गर्भ संस्कार गर्भाधान के लिए कितने आवश्यक है।

आज के दौर में दुनिया में तमाम प्रकार के आकर्षण के बीच वंशवृद्धि परमात्मा का प्रसाद है। वंशवृद्धि के साथ राष्ट्र निर्माण की धारा भी निकलती है। इस दौर में क्या क्या सावधानी रखना है। यह बहुत जरूरी है। इसलिए प्रदेश के अस्पतालों में गर्भ संस्कार कक्ष भी खोले जाएंगे। नए अस्पतालों की डिजाइन में ही इसका प्रावधान किया जाएगा।

कार्यक्रम में आरएएस के पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने कहा कि भारत उत्थान की राह पर चल रहा है। आजकल विश्वगुरु की बातें भी चलती है। भारत के चिंतन में भी सुपर पावर बनना है। हमारे देश ईश्वर का सही विश्व को मार्ग बताता है। उसमें विश्व का मार्गदर्शन  करने का सामर्थ है।

कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि  गर्भधान के समय माता-पिता की मानसिक स्थिति बहुत महत्वपूर्ण है। इसका असर गर्भ में पैदा होने वाले शिशु पर पड़ता है। मां अपने खून, रक्त से अपने शरीर के भीतर एक शरीर का निर्माण करती है। मां की साधना एक साधु की साधना से बड़ी है। जो स्त्री परिवार को बच्चा दे रही है, वह वंदनीय है। मनुष्य का कर्म उसके भाग्य और भविष्य का निर्माण करता है। जब व्यक्ति अपनी जीवन शैली, व्यवहार में बदलाव करता है तो उसका असर जींस पर पड़ता है। आपके बच्चे में आपका डीएनए होता है।



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