जूनी इंदौर पुलिस ने खातीवाला टैंक क्षेत्र में संचालित एक क्लीनिक के संचालक और डॉक्टर के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। यह कार्रवाई एक महिला की उपचार के दौरान हुई मृत्यु और फर्जीवाड़े की शिकायतों के बाद की गई है। प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित क्लीनिक को पहले ही सील कर दिया था।

पुलिस प्रशासन की सख्त कार्रवाई

पुलिस ने मार्तंड नगर निवासी रोहन चौहान की शिकायत के आधार पर हर्ष क्लीनिक के संचालक श्रीचंद बागेजा और डॉक्टर ज्ञान एस. पंजवानी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपियों पर मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम 1987 और म.प्र. चिकित्सा शिक्षा संस्था नियंत्रण अधिनियम 1973 की विभिन्न धाराओं सहित भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 49 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को मिली शिकायतों में यह बात सामने आई थी कि उक्त क्लीनिक में कथित तौर पर फर्जी डिग्री के आधार पर प्रतिबंधित दवाओं से आम जनता का उपचार किया जा रहा था।

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इलाज के दौरान महिला की मृत्यु का मामला

घटनाक्रम के अनुसार 18 सितंबर 2025 को मंजू चौहान नामक महिला की हर्ष क्लीनिक में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। इसके पश्चात मृतका के पुत्र रोहन चौहान ने अक्टूबर माह में वरिष्ठ अधिकारियों से इस संबंध में लिखित शिकायत की थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि क्लीनिक में न केवल गलत तरीके से इलाज किया जा रहा था बल्कि वहां प्रतिबंधित औषधियों का भंडारण भी किया गया था। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए कलेक्टर और कमिश्नर कार्यालय के चक्कर लगाए।

जांच दल की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

मामले की तह तक जाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. दिव्यानी अग्रवाल के नेतृत्व में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया था। इस टीम में डॉ. वीरेंद्र राजगिर और डॉ. अभिषेक निगम को शामिल किया गया था। साथ ही औषधि निरीक्षक सारिका अग्रवाल ने भी स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि श्रीचंद बागेजा बिना किसी वैध चिकित्सकीय अनुमति या डिग्री के एलोपैथिक पद्धति से मरीजों का उपचार कर रहा था। वहीं डॉक्टर ज्ञान एस. पंजवानी ने उसे अपने सहायक के रूप में रखा हुआ था और उसकी अवैध गतिविधियों को संरक्षण दे रहे थे। जांच प्रतिवेदन के आधार पर जूनी इंदौर पुलिस ने अब कानूनी शिकंजा कस दिया है।



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