मप्र सरकार के बजट 2026 पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। किसी ने बजट को बेहतर किसी ने सामान्य तो किसी ने कमजोर बताया है। सभी अपने अपने स्तर पर बजट पर प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। सरकार ने बजट में कई वर्गों को खुश किया है तो कई वर्ग नाराज नजर आ रहे हैं।
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इंदौर की महिला उद्यमियों ने बजट पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दी हैं। श्रेष्ठा गोयल ने कहा कि बजट महिला उद्यमियों के लिए सकारात्मक और उत्साहजनक है। सुनीता जैन ने कहा कि मुद्रा लोन की सीमा बढ़ाना और वर्किंग कैपिटल के लिए आसान क्रेडिट छोटे बिजनेस को स्केल करने में मदद करेगा। श्वेता सिसोदिया ने कहा कि बजट में स्किलिंग प्रोग्राम्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देने से ‘विमेन-लीड स्टार्टअप्स’ को नए अवसर मिलेंगे। रूपाली जागीरदार और तनवीर जैन ने कहा कि मप्र सरकार के बजट 2026 में सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है। विशेष रूप से महिलाओं के लिए कई सकारात्मक खबरें आई हैं। भारती सोनी, कविता जैन और पूजा दुबे ने कहा कि शी मार्ट जैसी योजनाएं लाई गई हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को भी व्यापार की मुख्य धारा में शामिल करेंगी। इससे पता चलता है कि बजट में महिलाओं का कितना ध्यान रखा गया है।

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डॉक्टर ब्रजबाला तिवारी, अर्चना जायसवाल, राकेश सिंह यादव
– फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
स्वास्थ्य सुविधाओं को नए स्तर पर ले जाएगा बजट
सरकार ने 8वीं तक टेट्रा पैक दूध फ्री देने की जो घोषणा की है वह दिखाती है कि स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर अब नए सिरे से सोचा जा रहा है। आयुष्मान और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के लिए भी सरकार ने बजट बढ़ाया है। इससे जिले से लेकर ग्रामीण स्तर तक स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने में मदद मिलेगी।
– डॉक्टर, ब्रजबाला तिवारी
‘मुंगेरीलाल का सपना’ दिखा रही सरकार
मध्यप्रदेश सरकार का बजट 2026 ‘मुंगेरीलाल का सपना’ है। पिछले बजट (2025) की घोषणाएं जैसे लाड़ली बहना योजना के ₹3000, 3 लाख नौकरियां, और रोडवेज बसें पूरी तरह लापता रहीं। इंदौर-भोपाल मेट्रोपॉलिटन, राम वन गमन पथ, सांदीपनि गुरुकुल, और 39 नए उद्योग क्षेत्रों जैसे वादे कागजों तक ही सीमित रह गए। बजट में किसानों को MSP, युवाओं को रोजगार और अपराध व ड्रग्स पर कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है। सरकार जनहित की योजनाओं के बजाय केवल ‘जुमलों’ के सहारे शासन कर रही है।
– राकेश सिंह यादव, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व महासचिव
सरकार का बजट ‘झूठ का पुलिंदा’
मध्यप्रदेश सरकार का बजट ‘विकास नहीं, महाविनाश’ और ‘झूठ का पुलिंदा’ है। लाड़ली बहना योजना में ₹3000 का वादा, 2026 की नौकरियां, उद्योग क्षेत्र, उज्जैन का सांदीपनि गुरुकुल और खरगोन का नया कॉलेज जैसी घोषणाएं धरातल से पूरी तरह गायब हैं। बजट में न तो किसानों को MSP मिली, न ही बेरोजगारों और महिलाओं के लिए रोजगार की कोई ठोस योजना है। मजदूर और बुजुर्ग भी राहत से वंचित हैं। चंबल का डोकरका जलाशय, नर्मदा परिक्रमा पथ और चित्रकूट का राम वन गमन पथ जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स अब तक अधूरे और उपेक्षित हैं। 13 करोड़ जनधन खातों का बंद होना और ₹75,000 करोड़ का घाटा सरकार की आर्थिक नाकामी को दर्शाता है।
– अर्चना जायसवाल, पूर्व प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष
