शहर में नर्मदा के पानी में ड्रेनेज के पानी मिलने की घटनाएं पिछले कुछ साल में लगातार बढ़ी हैं। शहर की संस्थाओं ने इनके पीछे कई कारण बताए हैं और यह भी बताया है कि किस तरह से अब आगे काम करना चाहिए।
बैकलाइन जरूरी, जनता जागरूक हो, अधिकारियों और नेताओं की जवाबदेही तय की जाए
अभ्यास मंडल के शिवाजी मोहित ने कहा कि शहर में बैकलाइन के खत्म होने और नियोजन की कमियों के कारण जल जनित बीमारियों का खतरा गंभीर रूप से बढ़ गया है। पुराने इंदौर में भागीरथपुरा जैसे क्षेत्रों में स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि घरों के पीछे की जगह खत्म होने से ड्रेनेज लाइनें अब पीने के पानी की लाइनों के बिल्कुल करीब आ गई हैं। इससे यह घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
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पानी की सेंपलिंग का काम हर वार्ड में लगातार होना चाहिए
सेवा सुरभी के ओमप्रकाश नरेड़ा ने बताया कि सांवेर रोड पर उद्योगों का पानी बोरिंग में मिल रहा है। अभी जिस तरह से प्रशासन अलर्ट है, उसे हमेशा उसी तरह से काम करना चाहिए। शहर के सभी वार्ड में सैंपलिंग लगातार होना चाहिए। हवा और पानी के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। जिम्मेदारों पर तुरंत कार्रवाई होना चाहिए।
पुरानी निर्माण शैली बनाम आधुनिक संकट
आर्किटेक्ट अतुल सेठ ने कहा कि पुराने समय में मकानों के पीछे एक खाली हिस्सा यानी बैकलाइन छोड़ी जाती थी जहां ड्रेनेज लाइन डाली जाती थी। पीने के पानी की लाइन घर के सामने होती थी जिससे दोनों में पर्याप्त दूरी बनी रहती थी। अब जनसंख्या के दबाव और निर्माण नियमों में बदलाव के कारण बैकलाइन खत्म हो गई है। जमीन की कमी और अतिक्रमण की वजह से ड्रेनेज और नर्मदा लाइनें एक-दूसरे के पास डाली जा रही हैं, जिससे संक्रमण फैल रहा है।
अधिकारियों और नेताओं की जवाबदेही कौन तय करेगा
संस्था चेतना के राहुल शर्मा ने कहा कि क्षेत्रीय निवासियों का आरोप है कि वे लंबे समय से गंदे पानी की समस्या झेल रहे थे। शिकायतों के बावजूद नगर निगम के अधिकारियों और नेताओं ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। कई स्थानों पर पाइप लाइनें टूटी और खुदाई के कारण स्थिति और बिगड़ गई। राहुल ने कहा कि यहां पर नेताओं और अधिकारियों की जवाबदेही तय होना चाहिए, जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी शहर में यह घटनाएं होती रहेंगी।
प्रमुख कारण
नेताओं और अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं है जिससे घटनाएं बढ़ रही हैं।
शहर में जन आंदोलन पूरी तरह से खत्म हो गए जिससे जिम्मदारों में कार्य के प्रति गंभीरता खत्म हो गई।
घरों के पीछे की बैकलाइन का पूरी तरह समाप्त होना या उन पर अवैध निर्माण होना।
ड्रेनेज और नर्मदा पेयजल पाइप लाइनों का एक-दूसरे के अत्यंत करीब (1-2 फीट) होना।
नगर निगम द्वारा शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई न करना और आधा-अधूरा काम छोड़ना।
गलियों और सड़कों पर ड्रेनेज का पानी जमा होना जो पेयजल लाइनों में लीकेज के जरिए पहुंचता है।
संभावित समाधान
नेताओं और अधिकारियों की जवाबदेही तय हो, गलती पर सजा मिले।
जनता सड़कों पर आंदोलन करे, शहर के हित में लगातार आवाज उठाए।
भविष्य की कॉलोनियों के नक्शों में बैकलाइन के अनिवार्य प्रावधान को कड़ाई से लागू करना।
पेयजल और ड्रेनेज लाइनों के बीच एक सुरक्षित मानक दूरी तय करना और पुरानी लाइनों को शिफ्ट करना।
ड्रेनेज चोक और पाइप लीकेज की शिकायतों के लिए त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम तैयार करना।
पुराने क्षेत्रों में जहाँ लाइनें सटकर चल रही हैं, वहाँ आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों से लीकेज प्रूफिंग करना।
