शहर का बायपास इन दिनों हादसों का मुख्य केंद्र बनता जा रहा है। बायपास पर वर्तमान में दो अलग-अलग स्थानों पर ब्रिज निर्माण का कार्य प्रगति पर है। निर्माण कार्यों की वजह से कई पुराने रास्तों को बंद किया गया है और यातायात को अन्य मार्गों पर डायवर्ट किया गया है। इसी कड़ी में होटल द पार्क के समीप बायपास को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग को भी बंद किया गया है, लेकिन यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से राहगीरों की जान खतरे में है।
होटल द पार्क के पास खुदा गहरा गड्ढा बना मुसीबत
ब्रिज निर्माण के लिए होटल के आसपास बड़े स्तर पर खुदाई का कार्य किया गया है। निर्माण स्थल पर पहले बैरिकेडिंग की गई थी ताकि वाहन चालक सीधे खुदाई वाले क्षेत्र में न जा सकें, लेकिन अब उस बैरिकेडिंग को वहां से हटा दिया गया है। स्थिति यह है कि वाहन चालक बिना किसी चेतावनी के सीधे गड्ढे के मुहाने तक पहुंच रहे हैं। रात के अंधेरे में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, क्योंकि तेज रफ्तार वाहन चालक खुदाई वाले क्षेत्र को पहचान नहीं पाते और गड्ढे के बिल्कुल करीब पहुंचकर अचानक वाहन रोकते हैं, जिससे पीछे से आने वाले वाहनों के टकराने का खतरा भी बना रहता है।
ये भी पढ़ें- इंदौर के एलिवेटेड काॅरिडोर पर फिलहाल रोक नहीं, अब सुनवाई 25 फरवरी को
रिंग रोड से जुड़ाव के कारण ट्रैफिक का भारी दबाव
यह मार्ग काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे बायपास को रिंग रोड से कनेक्ट करता है। इस वजह से यहां दिन-रात ट्रैफिक का बहुत अधिक दबाव रहता है। कुछ समय पहले जब काम शुरू हुआ था, तब बैरिकेडिंग लगाकर ट्रैफिक को आसपास के रास्तों पर मोड़ा गया था। अब बैरिकेडिंग हटने से वाहन चालक तेज गति से इस रास्ते पर आ जाते हैं। यहां खुदाई इतनी गहरी है कि इसमें कई कारें एक साथ समा सकती हैं, ऐसे में एक छोटी सी चूक बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है।
पैदल यात्रियों की आवाजाही से बढ़ता भ्रम
गड्ढे के किनारे से एक छोटा अस्थाई रास्ता बनाया गया है, जिसका उपयोग पैदल चलने वाले लोग करते हैं। रात के समय जब वाहन चालक दूर से पैदल यात्रियों को वहां से गुजरते हुए देखते हैं, तो उन्हें यह भ्रम होता है कि आगे का रास्ता वाहनों के लिए भी खुला है। इसी गलतफहमी में वे रफ्तार कम नहीं करते और सीधे खतरे के पास पहुंच जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां कोई सुरक्षाकर्मी भी तैनात नहीं है जो लोगों को रोक सके।
सुरक्षा समिति ने दी चेतावनी
प्रशासन द्वारा गठित हादसों की जांच समिति के सदस्य अतुल शेठ ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि बायपास पर निर्माण कार्यों के दौरान लोगों को बहुत संभलकर चलने की जरूरत है। रात के समय खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि विजिबिलिटी कम होती है। उन्होंने सुझाव दिया है कि प्रशासन को केवल बैरिकेडिंग ही नहीं बल्कि रिफ्लेक्टिव मार्किंग का भी उपयोग करना चाहिए ताकि दूर से ही खतरा नजर आ सके। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पहले भी सुझाव दिए गए हैं लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन नहीं दिख रहा है।
