इंदौर के मेट्रो स्टेशन निर्माण हेतु रानी सराय क्षेत्र के लगभग 250 प्राचीन पेड़ों को काटने के विरोध में 15 फरवरी, रविवार को एक बड़ा जन प्रदर्शन आयोजित किया गया। शाम 5 बजे से 6 बजे के बीच रीगल तिराहे पर जनहित पर्यावरण मंच के तत्वावधान में स्कूली बच्चे बड़ी संख्या में एकत्र हुए। इन नन्हे पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन और वर्तमान व्यवस्था से सीधे सवाल पूछे कि क्या भविष्य में उन्हें स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और पेड़ों पर चहकते पक्षी देखने को नहीं मिलेंगे? बच्चों ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए पूछा कि क्या आने वाली पीढ़ियों को हमेशा मास्क पहनकर ही जीवन व्यतीत करना होगा?

यह भी पढ़ें…

Indore News: इंदौर पहुंचे सीएम डॉ. मोहन यादव, महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं दी, टीम इंडिया की तारीफ की

पेड़ और परिंदों के वेश में पहुंचे स्कूली छात्र

इस विरोध प्रदर्शन को प्रभावी बनाने के लिए जनहित पर्यावरण मंच के कार्यकर्ताओं ने शहर के विभिन्न स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में संपर्क किया था। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि बच्चे केवल तख्तियां लेकर ही नहीं आए, बल्कि कई छात्र स्वयं पेड़ और तोतों का रूप धारण कर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। बच्चों द्वारा अपने स्वस्थ भविष्य के लिए किया गया यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन शहर में चर्चा का विषय बना रहा। इस अनोखे विरोध के जरिए बच्चों ने जनता और प्रशासन को प्रकृति के प्रति उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराया।

लंबे समय से जारी है रानी सराय बचाने की मुहिम

रानी सराय के पेड़ों और उन पर बसे हजारों तोतों के आशियाने को बचाने के लिए शहर के प्रबुद्ध नागरिक और विभिन्न संस्थाएं लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं। इससे पूर्व जनहित पार्टी द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय जैन के नेतृत्व में 1 जनवरी से 30 जनवरी तक कड़कड़ाती ठंड में रानी सराय परिसर में ही दिन-रात का धरना दिया जा चुका है। वर्तमान में यह मामला कानूनी प्रक्रिया के अधीन भी है, जहां हाईकोर्ट ने पर्यावरण प्रेमियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली तारीख तक पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगा रखी है।

विभिन्न सामाजिक संगठनों का मिला समर्थन

रविवार को आयोजित इस प्रदर्शन का उद्देश्य पेड़ों की कटाई पर स्थायी रोक लगवाना था ताकि हजारों पक्षियों का घर न उजड़े। इस मुहिम में जनहित पार्टी के साथ-साथ पर्यावरण प्रेमी मंच, खंडेलवाल जनमंच, अभ्यास मंडल, जीवन प्रवाह और आम आदमी पार्टी सहित शहर की कई प्रमुख समाजसेवी संस्थाएं कंधे से कंधा मिलाकर शामिल हुईं। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट मत है कि विकास के नाम पर शहर की हरियाली और जैव विविधता की बलि नहीं दी जानी चाहिए।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed