आज महाशिवरात्रि के पावन पर्व को लेकर इंदौर शहर के प्रमुख शिवालयों में आकर्षक सजावट, विशेष पूजन-अर्चन और रात्रि जागरण का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर परिसर को फूलों, रंगीन रोशनी और धार्मिक प्रतीकों से भव्य रूप में सजाया गया है, जिससे पूरा शहर शिवमय वातावरण में रंग गया है। श्री गेंदेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर (शिवधाम) में तड़के 4 बजे से विशेष भस्म आरती हो रही है, जिसके बाद स्वर्ण कलश से भगवान का अभिषेक किया जा रहा है। शहर के अन्य छोटे-बड़े मंदिरों में भी अभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। श्री बड़े बालाजी, श्री सिद्धेश्वर वीर हनुमान मंदिर समेत कई मंदिरों में भगवान हुनमान को भी शिव के रूप में सजाया गया है।
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धार्मिक अनुष्ठानों की रूपरेखा और व्यवस्थाएं
मंदिर समितियों द्वारा भस्म आरती, रुद्राभिषेक, शिव विवाह कथा, भजन-कीर्तन और तांडव आरती जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों की रूपरेखा तय की गई है। श्रद्धालुओं की निरंतर बढ़ती भीड़ को देखते हुए दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया जा रहा है, ताकि भक्तों को सुगमता से पूजन का लाभ मिल सके। शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। नगर निगम द्वारा भी विशेष रूप से साफ-सफाई, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन और मंदिर समितियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनुशासन बनाए रखें और निर्धारित नियमों का पालन करते हुए पर्व को सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाएं।
आठ दिवसीय शिव विवाह महोत्सव
महाशिवरात्रि के अवसर पर श्री गेंदेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर (शिवधाम) में भव्य 8 दिवसीय शिव विवाह महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर परिसर को आकर्षक रंग-रोगन, विद्युत सज्जा, केसरिया पताकाओं, भव्य प्रवेश द्वार और विभिन्न मंचों से सजाया गया है। पूरे महोत्सव के दौरान शिवधाम पूरी तरह भक्तिरस में डूबा हुआ है। महोत्सव के दौरान प्रतिदिन भगवान भोलेनाथ का अलग-अलग आकर्षक शृंगार किया जा रहा है। मंदिर परिसर में बैंड-बाजों की गूंज, शहनाई वादन, भजन मंडलों द्वारा संगीतमय आराधना तथा धार्मिक अनुष्ठानों की निरंतर शृंखला चल रही है। इस महोत्सव के दौरान सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का पूजन-अर्चन विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 9 फरवरी से ही यहां विशेष शृंगार और भजन-कीर्तन के कार्यक्रम चल रहे हैं।
विविध धार्मिक अनुष्ठान और विवाह की रस्में
महोत्सव के अंतर्गत 12 फरवरी को सुबह 10 बजे पार्थिव गणेश स्थापना की गई, जिसमें महिला संगठनों द्वारा नृत्य-नाटिका और भजनों की प्रस्तुति दी गई। 13 फरवरी को पार्थिव काली पूजन, नवचंडी पाठ एवं माताजी के भजनों का गायन हुआ। 14 फरवरी को भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती को हल्दी एवं तेल अर्पित कर पारंपरिक विवाह की रस्में निभाई गईं, जहां महिलाओं ने हल्दी और गुलाल से होली खेली। इसके बाद मेहंदी और भजन संध्या का आयोजन हुआ व भगवान को मंडप में विराजमान किया गया। ऐसी मान्यता है कि शिवधाम में चढ़ी हल्दी विवाह योग्य युवाओं को लगाने से शीघ्र विवाह के योग बनते हैं। आज 15 फरवरी को मंदिर में भस्म आरती और स्वर्ण कलश अभिषेक के साथ शाम को शंकर-पार्वती दूल्हा-दुल्हन स्वरूप में दर्शन देंगे और रात्रि 8 बजे तांडव आरती होगी।
महोत्सव का भव्य समापन
इस भव्य आयोजन का समापन 16 फरवरी को होगा। इस दिन भगवान भोलेनाथ का दूल्हे के रूप में विशेष शृंगार कर महाआरती की जाएगी, जिसके साथ ही इस आठ दिवसीय शिव विवाह महोत्सव का औपचारिक समापन होगा। शिवरात्रि के दिन भर फरियाली भंडारा और रात्रि भर विभिन्न रसों से अभिषेक का सिलसिला जारी रहेगा।
