इंदौर स्थित मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग कार्यालय के बाहर पिछले चार दिनों से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने मंगलवार शाम को अपना धरना समाप्त कर दिया। नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के अंतिम दिन छात्रों ने आयोग की कार्यप्रणाली और सरकार की बेरुखी के खिलाफ मौन धारण किया। छात्रों का कहना था कि बार-बार आश्वासन के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के युवाओं में भारी रोष व्याप्त है।

आयोग के बाहर चस्पा किया ज्ञापन

धरने के अंतिम चरण में जब आयोग का कोई भी वरिष्ठ अधिकारी छात्रों से चर्चा करने या ज्ञापन लेने बाहर नहीं आया, तो अभ्यर्थियों ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए ज्ञापन को आयोग के मुख्य द्वार पर ही चस्पा कर दिया। इस दौरान छात्रों ने सामूहिक रूप से बेरोजगारी को जड़ से खत्म करने की शपथ ली। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि भले ही वे अभी धरना स्थल से हट रहे हैं, लेकिन उनकी वैधानिक लड़ाई जारी रहेगी।

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से मिली थी अनुमति

उल्लेखनीय है कि इस प्रदर्शन के लिए प्रशासन ने पहले अनुमति देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद मामला मप्र हाईकोर्ट पहुंचा। न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने प्रशासन के पुराने आदेश को आंशिक रूप से निरस्त करते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन को नागरिकों का मौलिक अधिकार बताया। कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ 24 जनवरी से 27 जनवरी 2026 की दोपहर तक धरना देने की अनुमति प्रदान की थी, जिसके बाद छात्र इस कड़ाके की ठंड में डटे रहे।

अधूरे वादों से उपजा छात्रों का आक्रोश

अभ्यर्थियों ने बताया कि ठीक 13 महीने पहले दिसंबर 2024 में भी इसी तरह का एक बड़ा आंदोलन हुआ था। उस समय जिला प्रशासन ने कई मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन देकर धरना खत्म कराया था। हालांकि, छात्रों का आरोप है कि एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अधिकांश वादे कागजों तक ही सीमित रहे। इसी उदासीनता के कारण छात्रों को दोबारा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।



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