शहर में पानी और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर सीएम हेल्पलाइन पर बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हैं, लेकिन उनके निराकरण की रफ्तार बेहद धीमी है। राज्य सरकार की सीएम हेल्पलाइन पर इंदौर से पानी और ड्रेनेज से जुड़ी कुल 880 शिकायतें अब भी लंबित पड़ी हैं।

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पानी की 192 और ड्रेनेज की 690 शिकायतें


सीएम हेल्पलाइन के आंकड़ों के अनुसार इंदौर शहर के अलग-अलग वार्डों से नलों में गंदा पानी आने की 192 शिकायतें दर्ज की गई हैं। वहीं ड्रेनेज लाइन चोक होने की 690 शिकायतें नागरिकों द्वारा की गई हैं, जिनका समाधान अब तक नहीं हो पाया है।

वार्ड 23 में सबसे ज्यादा शिकायतें


गंदे पानी को लेकर सबसे ज्यादा 22 शिकायतें वार्ड क्रमांक 23 से सामने आई हैं, जो भागीरथपुरा से लगा हुआ परदेशीपुरा क्षेत्र है। यहां नागरिकों ने नलों से गंदा पानी आने की लगातार शिकायत की है।

बीमार पड़े लोग, सर्वे और दवा वितरण शुरू


वार्ड की पार्षद विनीता मौर्य के अनुसार परदेशीपुरा, क्लर्क कॉलोनी, गणेश नगर, लाल गली, कोली मोहल्ला और बैरवा समाज के बगीचा क्षेत्र में गंदे पानी की समस्या सबसे अधिक है। भागीरथपुरा में हालात बिगड़ने के बाद आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए घर-घर सर्वे कराया गया और पानी शुद्ध करने की दवाइयां वितरित की गईं। इस वार्ड के दो नागरिक डायरिया से पीड़ित होकर एमवाय अस्पताल में भर्ती हैं।

भागीरथपुरा सहित अन्य वार्डों से भी शिकायतें


सीएम हेल्पलाइन पर भागीरथपुरा क्षेत्र से 13 शिकायतें दर्ज हैं। इसके अलावा वार्ड क्रमांक 1 और 55 से कुल 99 शिकायतें आई हैं। वहीं वार्ड क्रमांक 4, 17, 45, 70 और 72 से प्रत्येक वार्ड से 66-66 शिकायतें दर्ज हुई हैं। वार्ड क्रमांक 35, 53 और 63 से प्रत्येक से 5-5 शिकायतें सामने आई हैं, जबकि शेष वार्डों से सीमित संख्या में शिकायतें दर्ज की गई हैं।

शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे अधिकारी


नागरिकों का आरोप है कि इंदौर नगर निगम के अधिकारी सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते। भागौरवपुरा क्षेत्र में गंदा पानी आने की शिकायतें घटना के खुलासे से पांच दिन पहले ही सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गई थीं, लेकिन नगर निगम की ओर से समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई।

मंत्री के दौरे के बाद हुआ मामला उजागर


भागीरथपुरा में गंदे पानी से फैली बीमारी का मामला तब सामने आया, जब प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अस्पताल में भर्ती उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीजों का हाल जानने पहुंचे। इसके पहले बड़ी संख्या में नागरिकों ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। यदि समय पर इन शिकायतों पर कार्रवाई होती, तो हालात इतने गंभीर नहीं होते।



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