मध्यप्रदेश शासन ने न्यूनतम समर्थन मूल्य अर्थात एमएसपी पर गेहूं खरीदी की पूर्व निर्धारित तिथियों में महत्वपूर्ण संशोधन कर दिया है। शासन द्वारा जारी किए गए नवीनतम आदेश के अनुसार अब इंदौर संभाग, उज्जैन संभाग, भोपाल संभाग और नर्मदापुरम संभाग में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी का कार्य 10 अप्रैल से प्रारंभ किया जाएगा। इससे पहले इन विशिष्ट संभागों में खरीदी की प्रक्रिया एक अप्रैल से शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे अब प्रशासनिक कारणों से संशोधित कर दिया गया है।
इस व्यवस्था के अंतर्गत इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभागों को छोड़कर प्रदेश के शेष अन्य सभी संभागों में गेहूं खरीदी का कार्य 15 अप्रैल से शुरू किया जाएगा। इंदौर जिले में इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रशासन ने कुल 90 उपार्जन केंद्र निर्धारित किए हैं। इन केंद्रों का वर्गीकरण इस प्रकार किया गया है कि इसमें 65 केंद्र गोदाम स्तर पर, 13 केंद्र समिति स्तर पर, 7 केंद्र स्टील सायलो स्तर पर और 5 केंद्र मंडी स्तर पर संचालित होंगे। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए कम से कम प्रतीक्षा करनी पड़े और बेहतर प्रबंधन के साथ उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की अनिवार्य व्यवस्था
गेहूं विक्रय की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने स्लॉट बुकिंग प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू किया है। इस प्रणाली के माध्यम से किसान अपनी व्यक्तिगत सुविधा के अनुसार किसी भी उपलब्ध तिथि का चयन कर सकते हैं और निर्धारित केंद्र पर जाकर अपना गेहूं बेच सकेंगे। स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।
स्लॉट बुकिंग करने के लिए किसानों के पास कई विकल्प मौजूद हैं। वे अपने नजदीकी एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर यानी सीएससी पर जाकर या स्वयं ही एमपी ई-उपार्जन पोर्टल के माध्यम से अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और स्लॉट बुकिंग सुनिश्चित कर सकते हैं। प्रशासन ने किसानों से यह विशेष अपील की है कि वे अपने द्वारा बुक किए गए निर्धारित स्लॉट के दिन ही संबंधित केंद्र पर अपनी उपज लेकर पहुंचें। इससे केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ नहीं होगी और सुचारू खरीदी व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग मिलेगा।
अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने इस संबंध में प्रदेश के सभी संबंधित जिला अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों में स्पष्ट कहा गया है कि खरीदी प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी तरीके से संचालित करने के लिए सभी आवश्यक तकनीकी और बुनियादी तैयारियां निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण कर ली जानी चाहिए। विभाग ने इस बात पर भी विशेष बल दिया है कि केंद्रों पर आने वाले किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े, इसके लिए पेयजल, छाया और बैठने जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं दुरुस्त रखी जाएं।
