इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन से उत्पन्न हुआ संकट गहराता जा रहा है। अब तक इस त्रासदी के कारण कुल 16 लोगों की जान जा चुकी है। वर्तमान में लगभग 150 लोग विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग अस्पतालों के आईसीयू में भर्ती मरीजों को एक स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में शनिवार शाम को 12 गंभीर मरीजों को बॉम्बे हॉस्पिटल के आईसीयू में शिफ्ट किया गया है।
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नर्मदा लाइन और बोरिंग की जांच
नगर निगम और संबंधित विभाग भागीरथपुरा इलाके में पानी के स्रोतों की गहन जांच कर रहे हैं। विशेष रूप से क्षेत्र के बोरिंग में लीकेज की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है ताकि दूषित पानी के मिलने के कारणों का पता लगाया जा सके। स्थानीय निवासी ललित के अनुसार वर्तमान में क्षेत्र में नल के पानी की आपूर्ति बंद है और लोग पूरी तरह से टैंकरों द्वारा भेजे जा रहे पानी पर निर्भर हैं।
विपक्ष का सरकार पर हमला
इस मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर इन मौतों को सामान्य मृत्यु न बताते हुए हत्या करार दिया है। उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर इंदौर के प्रभारी मंत्री और मुख्यमंत्री मोहन यादव, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के इस्तीफे की मांग की है। पटवारी ने कहा कि जिस शहर ने स्वच्छता में कीर्तिमान रचे, वहां दूषित पानी से मौतें होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
11 जनवरी से जन जागरण करेगी कांग्रेस
जीतू पटवारी ने घोषणा की है कि कांग्रेस पार्टी 11 जनवरी से इंदौर की गलियों में जाकर जनता को जागरूक करने का अभियान शुरू करेगी। उन्होंने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जहां सभी विधायक और पार्षद भाजपा के हैं, वहां की जनता आज मूलभूत सुविधाओं और स्वच्छ पेयजल के लिए तरस रही है। उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी बात कही है।
सीएम और मंत्री सबसे बड़े दोषी
जीतू पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इस घटना के सबसे बड़े दोषी हैं। इन दोनों को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। इस घटना से पूरी दुनिया में इंदौर का नाम खराब हो गया है।
