इंदौर में शहर कांग्रेस की कार्यकारिणी घोषित हो गई है। यह पहला मौका है जब 20 वर्षों में कार्यकारिणी का आकार काफी छोटा रखा गया है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने सिर्फ 52 पदाधिकारी बताए हैं, जबकि कांग्रेस में जंबो कार्यकारिणी का चलन है। पंद्रह साल पहले शहर कार्यकारिणी में साढ़े पांच सौ से ज्यादा पदाधिकारी थे, जबकि पिछली कार्यकारिणी में ही 400 पदाधिकारी बने थे। इस बार की कार्यकारिणी में 52 पदाधिकारी बनाए गए हैं। जिनमें दस उपाध्यक्ष, 18 महामंत्री, 19 सचिव, दो प्रवक्ता, दो सोशल मीडिया प्रभारी और एक कोषाध्यक्ष बने हैं।

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इस बार कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी शैलेष गर्ग को दी गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कार्यकारिणी का विस्तार हो सकता है। स्थान नहीं मिलने से कई नेता नाराज हैं, हालांकि चौकसे ने सभी गुटों से जुड़े नेताओं को स्थान देकर संतुलन बनाने की कोशिश की है।

कार्यकारिणी में किसी भी महिला नेत्री को पद नहीं मिलने पर भाजपा ने सवाल उठाए हैं। भाजपा शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस लाड़ली बहना योजना का विरोध करते-करते खुद महिला विरोधी हो गई है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कहते हैं कि प्रदेश की महिलाएं ज्यादा शराब पीती हैं। अब कार्यकारिणी में एक भी महिला को पद न देकर कांग्रेस ने यह साबित कर दिया है कि वह महिला वर्ग के प्रति संवेदनशील नहीं है। कांग्रेस ने एक भी महिला को स्थान न देकर उनका अपमान किया है।

 

इस बार छोटी कार्यकारिणी बनाने पर जोर रहा। यह पहला मौका है जब शहर कार्यकारिणी में कम पदाधिकारी हैं। इस बात के लिए चौकसे ने प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी को भी राजी कर लिया था। अब विधानसभा अध्यक्षों का गठन भी जल्दी किया जाएगा। इस बार कांग्रेस में सोशल मीडिया प्रभारी भी बनाए गए हैं।



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