इंदौर में बुधवार को होली का पर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक उमंग के साथ मनाया गया। सुबह होते ही रंग खेलने का सिलसिला शुरू हो गया और बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। रंगों के इस उत्सव में सबसे ज्यादा उत्साह बच्चों में दिखाई दिया, जो हाथों में पिचकारी लिए एक-दूसरे पर रंगों की बौछार कर रहे थे। एक ओर जहां सड़कों पर हुरियारों की टोली नजर आ रही थी, वहीं दूसरी ओर महिलाएं घरों में पारंपरिक व्यंजन तैयार करने में व्यस्त रहीं। महाराष्ट्रीयन परिवारों में विशेष रूप से पुरन-पोली बनाई गई, तो कई घरों में मालवा के प्रसिद्ध व्यंजन दाल-बाफले महकते रहे।

आमतौर पर होलिका दहन के अगले दिन ही धुलेंडी का पर्व मनाया जाता है, लेकिन इस बार चंद्र ग्रहण के चलते तिथियों के फेर के कारण शहरवासियों ने मंगलवार के स्थान पर बुधवार को होली खेली। पुराने शहर के क्षेत्रों जैसे राजवाड़ा, मल्हारगंज, जूनी इंदौर, छावनी और सराफा में होली का विशेष रंग देखने को मिला। राजवाड़ा पर जनसैलाब इस कदर उमड़ा कि वहां तिल रखने की भी जगह नहीं थी। यहां युवाओं की टोली डीजे की धुन पर थिरकती नजर आई और लोग ऐतिहासिक धरोहर के सामने खड़े होकर सेल्फी लेते रहे। विशेषकर कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए राजवाड़ा आकर्षण का केंद्र बना रहा।

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सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस प्रशासन ने इस बार बेहद सख्त रुख अख्तियार किया था। शहर के प्रमुख चौराहों पर बैरिकेडिंग की गई थी ताकि हुड़दंगियों पर लगाम कसी जा सके। दोपहिया वाहनों पर तीन सवारी बैठाकर घूमने वाले युवकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस ने नियम तोड़ने वाले वाहनों के पहियों की हवा निकाल दी, जिसके बाद युवकों को वाहन पैदल ही घसीटना पड़ा।

होली के कारण बाजार पूरी तरह बंद थे, इसलिए हवा भराने के लिए भी लोग भटकते नजर आए। इसके अलावा शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई और कई वाहन जब्त किए गए। पुलिस की यह सघन चेकिंग देर रात तक जारी रही ताकि पिछले वर्षों की तरह होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और आपसी विवादों को रोका जा सके।



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