इंदौर में भारतीय जनता पार्टी के भीतर मचे घमासान के बीच अब कांग्रेस ने इस विवाद में अपनी एंट्री कर ली है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन का सम्मान करने के लिए कांग्रेस के नेता उनके निवास स्थान पर पहुंचे। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने सत्ताधारी दल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा अपने ही कर्मठ और वरिष्ठ नेताओं का निरंतर अपमान कर रही है। जिला कांग्रेस सेवादल कार्यकारी अध्यक्ष विवेक खंडेलवाल, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश जोशी एवं इंदौर शहर कांग्रेस कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव के साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता सत्तन के घर पहुंचे और उनसे कई विषयों पर चर्चा की।
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दशहरा मैदान के कार्यक्रम में नाराज हुए थे सत्तन
विवाद की जड़ रविवार को इंदौर के दशहरा मैदान पर आयोजित नगर निगम के भव्य कार्यक्रम में छिपी है। इस समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और मंत्री तुलसी सिलावट सहित शहर के तमाम दिग्गज जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। सत्यनारायण सत्तन को भी इस कार्यक्रम के लिए विशेष निमंत्रण भेजा गया था। जब सत्तन गुरु निमंत्रण का मान रखते हुए मंच की ओर बढ़ रहे थे, तब वहां तैनात एक कार्यकर्ता ने उन्हें रोक दिया। कार्यकर्ता का तर्क था कि बैठने की निर्धारित सूची और कुर्सियों पर उनका नाम अंकित नहीं है। इस अपमानजनक व्यवहार से आहत होकर सत्तन गुरु कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही वहां से वापस लौट आए थे।
भाजपा नगर अध्यक्ष के माफी मांगने के बाद पहुंचे कांग्रेसी
सोमवार को डैमेज कंट्रोल की कवायद में भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा सत्तन गुरु के घर पहुंचे। उन्होंने बंद कमरे में वरिष्ठ नेता से लंबी चर्चा की और उनका आशीर्वाद लिया। मीडिया से बात करते हुए मिश्रा ने कहा कि सत्तन गुरु हमारे मार्गदर्शक हैं और पार्टी के विभिन्न अभियानों में हमें सदैव उनका मार्गदर्शन मिलता रहता है। उन्होंने रविवार की घटना को एक दुर्भाग्यपूर्ण गलतफहमी करार दिया। मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि वे गुरुजी को आगामी कार्यक्रमों में वक्ता के तौर पर आमंत्रित करने आए थे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यदि गुरुजी नाराज होते हैं तो वे उनसे 25 बार माफी मांगने को तैयार हैं। इसके बाद कांग्रेसी नेता सत्तन का सम्मान करने पहुंच गए।
नई भाजपा और नई रीति-नीति पर सत्तन का कटाक्ष
पूरे मामले पर अपनी बेबाक राय रखते हुए सत्यनारायण सत्तन ने कहा कि अब पार्टी में नए लोग आ गए हैं और उनके रीति-रिवाज भी बदल गए हैं। उन्होंने बताया कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया था और रास्ते में रोककर कार्यक्रम में आने का आग्रह किया था। सत्तन गुरु के अनुसार चूंकि यह आयोजन नगर निगम का था, इसलिए वहां की अव्यवस्थाओं के लिए सीधे तौर पर महापौर ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब उन्हें बैठने की अनुमति नहीं मिली तो उन्होंने वहां से चले जाना ही उचित समझा।
