उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने अभ्यास मंडल की 65 वर्षों की सामाजिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्था केवल एक संगठन नहीं, बल्कि इंदौर की सामाजिक चेतना का सशक्त केंद्र रही है। उन्होंने कहा कि अभ्यास मंडल ने दशकों से समाज, संस्कृति, राष्ट्रवाद और युवाओं के चरित्र निर्माण के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया है। बदलते समय में युवाओं को दिशा देने के लिए ऐसे मंचों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने जीवन के भौतिक सुखों को छोड़कर राष्ट्रहित के लिए कार्य किया इसीलिए उन्हें आज याद किया जाता है। हमें सिर्फ इस बात के लिए याद रखा जाएगा कि हमने अपने देश और इस मिट्टी के लिए क्या किया है, इसलिए याद नहीं किया जाएगा कि हमारे घर के बाहर कितनी कारें खड़ी हैं। 

सबसे जरूरी है जीवन का उद्देश्य जानना

डॉ. राजेश दीक्षित नीरव ने अपने संबोधन में कहा कि आज एआई के दौर में हमें नए सिरे से सोचने की जरूरत है। नशा, मोबाइल और तमाम तरह के प्रलोभन आज युवाओं को घेर रहे हैं। इनसे बाहर निकलकर अपने जीवन के लक्ष्य का पहचानना होगा। उन्होंने कहा कि सबसे प्रमुख बात है जीवन में क्या करना है यह जानना। यदि यह जान गए तो फिर उसे पा भी लोगे। युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है। यदि युवाओं को सही समय पर सही मार्गदर्शन मिले, तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बन सकते हैं। उन्होंने युवाओं से आत्मविश्वास, अनुशासन और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का आह्वान किया।

आधुनिकता का अर्थ अपनी जड़ों से कटना नहीं

कार्यशाला के प्रथम सत्र का विषय “शहर विकास, आधुनिकता और युवा” रहा। इस सत्र के मुख्य वक्ता डॉ. प्रतीक श्रीवास्तव एवं वरिष्ठ पत्रकार अमित मंडलोई रहे।

डॉ. प्रतीक श्रीवास्तव ने कहा कि शहर का विकास केवल इमारतों, सड़कों और तकनीक से नहीं होता, बल्कि जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों से होता है। आधुनिकता का अर्थ अपनी जड़ों से कटना नहीं, बल्कि मूल्यों के साथ आगे बढ़ना है। वहीं पत्रकार अमित मंडलोई ने कहा कि युवा वर्ग को केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि परिवर्तनकर्ता बनना होगा। लोकतंत्र, मीडिया और समाज में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, और शहर की दिशा तय करने में उनकी भागीदारी निर्णायक सिद्ध हो सकती है। द्वितीय सत्र में “तेज रफ्तार जीवन और अकेला पड़ता युवा” विषय पर डॉ. शंकर गर्ग ने विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज का युवा बाहरी रूप से अत्यंत सक्रिय दिखता है, लेकिन भीतर से तनाव, अकेलेपन और असुरक्षा से जूझ रहा है। डिजिटल दुनिया ने सुविधा तो दी है, पर मानवीय संवाद कम किया है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य, संतुलित जीवनशैली, परिवार और समाज से जुड़े रहने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

कार्यशाला के तृतीय सत्र का विषय “उद्यमिता और नवाचार” रहा। इस सत्र के मुख्य वक्ता नरेंद्र सेन ने कहा कि आज का समय युवाओं के लिए अवसरों से भरा है। यदि नवाचार, कौशल और आत्मविश्वास को जोड़ा जाए, तो युवा स्वयं रोजगार सृजक बन सकते हैं। कार्यक्रम के अंतिम चरण में खुले मंच एवं प्रमाण पत्र वितरण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सीए नवीन खंडेलवाल उपस्थित रहे। खुले मंच पर युवाओं ने अपने विचार साझा किए। अतिथियों ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए युवाओं को निरंतर सीखते रहने का संदेश दिया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में कॉलेज युवाओं की सहभागिता रही। अभ्यास मंडल द्वारा आयोजित यह आयोजन युवाओं को वैचारिक रूप से सशक्त करने और समाज के प्रति उनकी भूमिका को स्पष्ट करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुआ। कार्यक्रम संचालन मनीष भालेराव कुणाल भंवर, आदित्य प्रताप सिंह, ग्रीष्म त्रिवेदी, बजेंद्र सिंह धाकड़, नयनी शुक्ला ने किया। 



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