इंदौर के भागीरथपुरा में अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो गई है। बस्ती के तीस प्रतिशत हिस्से में बिछाई गई नर्मदा लाइन से सप्लाई शुरू हो गई है। दो दिन पहले नगर निगम अफसरों ने नल से पानी के सैंपल भी लिए थे।

रिपोर्ट में भी साफ़ पानी आया है, हालांकि अभी भी रहवासियों को टैंकरों के पानी का उपयोग करने के लिए कहा जा रहा है। उधर अब नए मरीज मिलना भी कम हो गए हैं। दिनभर मरीजों से भरा रहने वाला बस्ती का आयुष्मान क्लीनिक भी अब खाली रहने लगा है। दिन में तीन-चार मरीज ही परेशानियां लेकर आ रहे हैं।

 

रविवार को उल्टी-दस्त के दो मरीज आए, लेकिन उनमें लक्षण कम थे। उनका इलाज घर पर ही किया जा रहा है। आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या भी कम होती जा रही है। अब छह मरीज आईसीयू में भर्ती हैं। उनमें से तीन की हालत गंभीर है, हालांकि उन्हें दूसरी बीमारियां भी हैं।

अब तक बस्ती में दूषित पानी पीने से 24 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर महिलाएं हैं। मृतकों में तीन की उम्र 40 साल से कम है। इनमें छह माह का शिशु भी शामिल है, जबकि बाकी मरीजों की उम्र 50 से 81 साल तक रही है।

30 से ज्यादा स्थानों पर मिले थे लीकेज

बस्ती में डायरिया के मरीज सामने आने पर नगर निगम ने पाइप लाइनों की जांच कराई थी। जिनमें मुख्य लीकेज बगीचे के पास था। पुलिस चौकी का शौचालय नर्मदा लाइन पर बना लिया गया था। शौचालय तोड़कर लीकेज ठीक किया गया, लेकिन लाइन में दूसरी जगह भी लीकेज मिले थे। इसके बाद निगम ने टंकी से बस्ती तक वितरण के लिए नई लाइन बिछाई है। जिससे बस्ती के 30 प्रतिशत हिस्से में सप्लाई हो रही है। पूरी बस्ती की लाइन बदलने में दो माह का समय लगेगा। जगह-जगह खुदाई होने के कारण टैंकरों से भी जल वितरण करने में परेशानी आ रही है।



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