प्रदेश का अग्रणी महानगर बन रहा इंदौर तमाम आवश्यक सुविधाओं के मामले में फिसड्डी साबित हो रहा है। बुधवार को ब्रजेश्वरी कॉलोनी में हुए भीषण अग्निकांड में आठ लोगों की मौत के बाद एक बार फिर अग्नि शमन सुविधाओं की कमी खुलकर सामने आई है। शहर की नगर निगम सीमा के 276 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में रहने वाली 31 लाख की आबादी के लिए सिर्फ पांच फायर स्टेशन अभी संचालित हैं, ये बहुत कम हैं। महानगर के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी लोगों की जान पर आफत बन रही है। आग लगने के मामलों में अक्सर शिकायत मिलती है कि फायर ब्रिगेड देरी से पहुंची। ताजा हादसे में भी दमकलों के डेढ़ घंटा देरी से पहुंचने का आरोप लगाया है।

बुधवार तड़के 3.30 से 4 बजे के बीच जब ब्रजेश्वरी कॉलोनी में पुगलिया परिवार के मकान में आग लगी तब गांधी हॉल स्थित अग्नि शमन केंद्र से दमकलें मौके पर पहुंची थीं। इन दोनों स्थानों की दूरी करीब सात किलोमीटर है। चूंकि, सुबह सुबह का वक्त था, इसलिए दमकलें पहुंचने में मात्र 20 मिनट का वक्त लगना था, जबकि मृतक के परिजनों का आरोप है कि दमकलें डेढ़ घंटे देरी से पहुंचीं।

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अभी यहां चल रहे फायर स्टेशन

इंदौर में नगर निगम के अधीन अभी पांच प्रमुख फायर स्टेशन चल रहे हैं। इनमें से अधिकतर पुराने और शहर के मध्य हिस्सों में स्थित हैं। ये मोती तबेला स्थित फायर ब्रिगेड मुख्यालय के अलावा गांधी हॉल परिसर, लक्ष्मीबाई नगर, धार रोड स्थित टिंबर मार्केट और सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र में स्थित हैं। ये फायर स्टेशन मुख्य रूप से पुराने शहर और व्यापारिक इलाकों में ही जल्द पहुंचकर आग बुझाने के प्रबंध कर पाते हैं, जबकि शहर के मुख्य केंद्र राजवाड़ा से चारों दिशाओं में 10 से 15 किलोमीटर तक रहवासी कॉलोनियों और व्यावसायिक केंद्रों का विस्तार हो चुका है।

इन क्षेत्रों में आग बुझाना और समय पर पहुंचना बड़ी चुनौती

इंदौर का विस्तार अब सुपर कॉरिडोर, एमआर 10, खंडवा रोड, बायपास, राऊ, देवगुराड़िया और निपानिया जैसे कई नए क्षेत्रों तक हो चुका है। ये इलाके मौजूदा अग्नि शमन केंद्रों से 10 किलोमीटर तक दूर हैं। ऐसे में आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड की दमकलों को पहुंचने में लगने वाला रिस्पॉन्स टाइम तेजी से बढ़ रहा है। दमकलें मौके पर पहुंचे और आग बुझाएं तब तक जान और माल का काफी नुकसान हो चुका होता है।

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10 नए फायर स्टेशनों की योजना

नगर निगम और इंदौर जिला प्रशासन ने इस समस्या को देखते हुए शहरी क्षेत्र में 10 नए फायर स्टेशन बनाने की योजना बनाई है। नए केंद्र राऊ, स्कीम नंबर 78, देवगुराड़िया, नए आईएसबीटी कुमेड़ी, निपानिया, कनाड़िया और पालदा में प्रस्तावित हैं। इनके अलावा कुछ उपकेंद्र भी विकसित करने की योजना है।

हर पांच किमी क्षेत्र में जरूरी है फायर स्टेशन : नारंग

इंदौर उत्थान संस्था के संयोजक अजित सिंह नारंग के अनुसार शहर में हर 3-4 किलोमीटर के दायरे में एक फायर स्टेशन होना चाहिए। ऐसा होने पर ही आग लगने की आपात स्थिति में 10 मिनट के भीतर मदद मौके पर पहुंच सकती है और लोगों की जान माल की हिफाजत की जा सकती है। अभी बाहरी इलाकों में दमकलों को पहुंचने में वक्त लगता है। महानगर बन रहे शहर में यातायात के साथ ही अग्नि शमन के साथ ही अन्य आवश्यक सेवाओं का विस्तार भी जरूरी है।


एक मिनट बाद ही रवाना हो गई थी दमकलें


सुबह 4 बजकर 1 मिनट पर आग लगने की सूचना आई थी। गांधी हॉल स्टेशन से एक मिनट के बाद ही गाड़ी रवाना हो गई। प्रोटोकॉल के अनुसार उसके पीछे टैंकर गया था। अमला समय पर पहुंचा, लेकिन आग का रूप विकराल था। फिर हमने दूसरे स्टेशनों से भी दमकलें मौके पर पहुंचाईं। गलियों में कारें व अन्य वाहन खड़े होने के कारण भी दमकलों को जाने में परेशानी आई।


-आशीष कुमार पाठक, अपर आयुक्त, नगर निगम इंदौर




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