भागीथपुरा में दूषित पानी की सप्लाई से अब तक 15 मौतें की बात सामने आईं हैं लेकिन सरकार ने जो स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की है। उसमें दूषित पानी से चार मौतें होना बताया है। हाईकोर्ट में दूषित पेयजल मामले में दो याचिकाएं लगी हैं। भागीरथपुरा में हुई मौतों में एक महिला का पोस्मार्टम किया गया, बाकी सभी को स्वास्थ्य विभाग प्रारंभिक तौर पर सामान्य मौतें बताता रहा है। बाद में चार मौतों की वजह डायरिया बताई गई है।
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भागीरथपुरा निवासी गीता बाई ध्रुवकर की शुक्रवार सुबह मौत हो गई। 68 वर्षीय गीताबाई को 24 दिसंबर को एमवायएच में भर्ती किया गया था। पति राजू ने बताया कि पत्नी गीता को 2 दिन से उल्टी दस्त हो रहे थे। घर पर दो-तीन दिन दवाई दी, लेकिन आराम नहीं पड़ा। अस्पताल में भर्ती करने पर भी कोई आराम नहीं दिख रहा था। इस पर उन्हें अरबिंदो अस्पताल में भर्ती किया गया था। लेकिन वहां भी हालत में कोई बदलाव नहीं आया। इस पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। बेटे ने रोते हुए कहा कि मेरी मां को गंदे पानी ने छिना है। जिन अफसरों ने बस्ती में गंदा पानी आने से नहीं रोका, उन्हें कड़ी सजा मिलना चाहिए। बस्ती में निर्दोष लोगों की जान जा रही है और जनप्रतिनिधि झूला झूल रहे है।
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रिपोर्ट आने में भी जानबूझ कर देरी
भागीरथपुरा मामले में सरकारी रिपोर्ट भी खूब इंतजार करवा रही है। मौतों का सिलसिला 28 दिसंबर से शुरू हो चुका था, लेकिन पहली रिपोर्ट दो जनवरी को आई जिसमें पेयजल दूषित बताया गया। जिन 15 मौतों की बात की जा रही है उनमें इनमें 9 महिलाएं, छह पुरुष और एक नवजात शामिल है। मौतों की वजह का खुलासा रिपोर्ट में शामिल नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने डायरिया की वजह से चार मौतें रिकार्ड की है। इंदौर में जब मुख्यमंत्री आए थे तो उन्हें भी अफसरों ने चार मौतें ही बताई, जबकि बस्ती में लगातार लोगों की मौत हो रही है।
