हाईकोर्ट के समक्ष कहा गया है कि डेथ ऑडिट में 16 मौतें दूषित पानी से होना पाई गई हैं, बाकी मौतों का ऑडिट नहीं हो पाया है। कोर्ट ने अफसरों से पूछा कि इसका आधार क्या है? क्या मृतकों के शवों का पोस्टमॉर्टम किया गया है? विसरा रिपोर्ट कहां है, उसमें क्या कहा गया है? लेकिन उसका जवाब अफसर ठीक से नहीं दे पाए। अगली सुनवाई पर सरकार को विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।
भागीरथपुरा मामले में मंगलवार को डेढ़ घंटे से ज्यादा बहस चली। याचिकाकर्ता रितेश ईनानी ने सरकार द्वारा गठित कमेटी पर सवाल उठाया और कहा कि उच्च स्तरीय कमेटी में सिर्फ अधिकारी हैं। कमेटी में गैर-सरकारी सदस्य भी होने चाहिए। कोर्ट के समक्ष 23 मौतों की रिपोर्ट पेश की गई और कहा गया कि 16 मौतें दूषित पानी की वजह से हुई हैं। चार मौतों का ऑडिट नहीं हो पाया है, जबकि तीन मौतों की वजह दूसरी बीमारी है।
रिपोर्ट अस्पष्ट, मौत की ठोस वजह नहीं बताई
सुनवाई के दौरान दूषित पानी से हुई अधिकृत मौतों की जानकारी भी अफसरों को देनी थी। पिछली सुनवाई पर प्रदेश के मुख्य सचिव वर्चुअली जुड़े थे और मरीज सामने आने के बाद किए गए इंतजामों की जानकारी दी थी। कोर्ट में डेढ़ घंटे चली सुनवाई के दौरान अफसर दूषित पानी की ठोस वजह नहीं बता पाए थे। अफसरों ने यह भी कहा था कि 14 मौतें दूषित पानी की वजह से हुई हैं, बाकी जिन लोगों की मौतें हुई हैं, उन्हें दूसरी बीमारियां भी थीं। इस बार सुनवाई के दौरान पेश की गई रिपोर्ट को हाईकोर्ट ने आई-वॉश करार दिया और कहा कि रिपोर्ट अस्पष्ट है। मौत के कारणों की ठोस वजह नहीं है।
हाईकोर्ट में अफसरों ने बताया कि दूषित पानी से जो भी लोग प्रभावित हुए हैं, उनका शासन की तरफ से मुफ्त इलाज भी किया जा रहा है। भागीरथपुरा में अब तक दूषित पानी से 28 मौतें हो चुकी हैं। अभी भी आठ लोग आईसीयू में हैं। बस्ती के 30 प्रतिशत हिस्से में नई लाइन बिछाई गई है और अब साफ पानी आ रहा है। बस्ती में नए मरीज भी मिलना बंद हो गए हैं।
