मध्यप्रदेश का बजट सुधारों और सौगातों के साथ विकसित मध्यप्रदेश के लिए दूरदर्शी बजट कहा जा सकता है। यह बजट अब तक का सबसे बड़े आकार वाला ऐसा बजट है, जिसमें प्रदेश के गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं, ग्रामीण विकास, सिंचाई, औद्योगिक विकास तथा बुनियादी ढाँचे के विकास पर केंद्रित है। प्रदेश को डिजिटल स्टेट के रूप में स्थापित करने के मद्देनजर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्टर, डिजिटल स्किल डेवलपमेंट और उन्नत आईटी पार्क के लिए इस बजट में प्रावधान किए गए हैं। बजट में पिछले वर्ष की तुलना में पूंजीगत परिव्यय में भारी वृद्धि करते हुए इसे एक लाख करोड़ रुपए के स्तर पर रखा गया है।

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चूँकि वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश में कर संग्रह लक्ष्य से अधिक रहा है और प्रदेश के संसाधन बढ़े हैं, ऐसे में 17 फरवरी को प्रस्तुत प्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण के तहत वर्ष 2025-26 में प्रदेश की वित्तीय स्थिति बेहतर प्रस्तुत हुई है।आर्थिक समीक्षा के मुताबिक वर्ष 2025- 26 में वास्तविक विकास दर 8.04 प्रतिशत रही है, जोकि राष्ट्रीय औसत 6 प्रतिशत से ज्यादा है। राज्य का जीएसडीपी वर्ष 2025-26 में तेज वृद्धि के साथ 16.69 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। प्रदेश की जीएसडीपी में पिछले एक वर्ष में 11.14 फीसदी की वृद्धि हुई है। प्रदेश में प्रतिव्यक्ति आय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1 लाख 69 हजार 50 रुपए हो गई है।

मध्यप्रदेश औद्योगिकी निवेश सोलर एनर्जी उत्पादन और कृषि उत्पादन में पहले क्रम पर है। प्रदेश से निर्यात बढ़ रहे हैं। प्रदेश देश में निर्यात के मद्देनजर 9वें क्रम पर है निर्यात में पीथमपुर की बदौलत धार 17830 करोड़ रुपए के उत्पाद निर्यात के साथ पहले क्रम पर और इंदौर 13500 करोड़ रु. मूल्य के निर्यात के साथ दूसरे क्रम पर हैं। बीते एक वर्ष में मध्यप्रदेश में 30.17 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए जिसमें से 8.57 लाख करोड़ रुपए के प्रस्ताव साकार हो चुके हैं। निश्चित रूप से नए बजट से जहां प्रदेश में विभिन्न वर्गों को लाभ होंगे, वहीं प्रदेश विकसित अर्थव्यवस्था बनने की डगर पर आगे बढ़ते हुए दिखाई देगा।

 

इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि इस बजट की चुनौतियां भी उभरकर दिखाई दे रही हैं। राजस्व प्राप्तियों का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा वेतन-भत्ते, कर्ज और उसका ब्याज चुकाने में व्यय होगा। एक अप्रैल 2026 से 16वें वित्त आयोग की अनुशंसा लागू होने के की वजह से मध्यप्रदेश को 7726 करोड़ रुपए कम मिलेंगे। राज्य पर 4.90 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है, जो कि प्रदेश के बजट आकार से भी अधिक है, पर राज्य का कर्ज जीएसडीपी का 31.30 प्रतिशत है, जो निर्धारित 33.7 प्रतिशत से कम है।

इस अनुकूलता के बावजूद सरकार को राजकोषीय घाटे पर उपयुक्त नियंत्रण रखना होगा।  नए वित्त वर्ष में आमदनी बढ़ाने के लिए आबकारी, खनिज उत्खनन जैसे क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा। नए बजट के उपयोग पर वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही पूरी तरह ध्यान देना होगा। पिछले वर्ष में इन्वेस्टर्स समिट के तहत प्राप्त निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार के द्वारा उसकी लगातार समीक्षा की जानी होगी। 



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